साड़ी वाली भाभी की चुदाई की चाहत

मेरा नाम आरव है। मैं 28 साल का हूँ और अपने बड़े भाई अनिरुद्ध के साथ दिल्ली में रहता हूँ। हमारा एक संयुक्त परिवार है, और हमारी पारिवारिक व्यवसाय में दोनों भाई काम करते हैं। मेरे भाई की शादी हो चुकी थी, और मैं उनसे तीन साल छोटा हूँ। मेरे भाई अनिरुद्ध की शादी मीरा से हुई थी। मैंने कभी ये नहीं सोचा था कि मैं अपनी भाभी जिसको मुख्य साड़ी वाली भाभी भी बोलने लगा उन साड़ी वाली भाभी की चुदाई की चाहत होने लगेगी और होने के बाद वो मिल भी जाएगी अगर मजा ना आए तो जरूर बताना
मीरा एक बेहद खूबसूरत और संस्कारी लड़की थी। उसकी उम्र 26 साल थी, और वह एक मध्यम वर्गीय परिवार से आती थी। जब पहली बार मैंने मीरा को देखा था, तब वह मेरे भाई की मंगेतर थी। तब मुझे उससे कोई खास लगाव महसूस नहीं हुआ था। मैं उस समय अपनी गर्लफ्रेंड प्रिया के साथ रिलेशनशिप में था, और मेरी पूरी दुनिया उसी के इर्द-गिर्द घूमती थी।
शादी के बाद मीरा हमारे घर में आ गई। वह एक समझदार और परिवारिक लड़की थी। वह सबका ध्यान रखती थी, खासकर मेरा। मुझे लगता था कि वह मुझे बहुत प्यार करती है, लेकिन मैं उस समय इतना व्यस्त था अपनी लाइफ में कि मैंने उस पर ध्यान नहीं दिया।
मीरा हमेशा से मुझे अपने छोटे भाई की तरह प्यार करती थी। वह मेरे लिए खाना बनाती, मेरे कपड़े तैयार रखती, और मेरी हर छोटी-मोटी जरूरत का ध्यान रखती। लेकिन मैं… मैं तो बस अपनी दुनिया में खोया रहता था।
फिर एक दिन मेरी जिंदगी बदल गई। प्रिया ने मुझे छोड़ दिया। उसने कहा कि वह मुझसे शादी नहीं कर सकती क्योंकि उसके पेरेंट्स को कोई और लड़का पसंद आ गया था। वह बिना किसी वजह के, बिना किसी स्पष्टीकरण के मेरी जिंदगी से चली गई। मैं टूट गया। मैं डिप्रेशन में चला गया। मैंने ऑफिस जाना बंद कर दिया, दोस्तों से मिलना-जुलना बंद कर दिया, और अपने कमरे में बंद होकर रहने लगा।
मेरे भाई और माता-पिता चिंतित थे, लेकिन वे कुछ कर नहीं पा रहे थे। लेकिन मीरा… मीरा ने मुझे संभालने की पूरी कोशिश की।
मीरा की कोशिशें
“आरव, खाना खा लो,” मीरा मेरे कमरे में आती और मुझे खाना देने की कोशिश करती।
“मुझे भूख नहीं है, भाभी। जाइए आप,” मैं उसे टाल देता।
“आरव, तुम ऐसे कब तक रहोगे? जिंदगी रुकी नहीं है। आगे बढ़ो,” वह समझाने की कोशिश करती।
“आपको क्या पता भाभी! आपको क्या पता क्या होता है जब कोई आपको प्यार करने का नाटक करके छोड़ दे!” मैं गुस्से में चिल्लाता।
मीरा चुपचाप सुनती और फिर धीरे से कहती, “शायद मुझे पता है, आरव। शायद मुझे भी पता है कि दर्द क्या होता है।”
मैं उसे देखता। उसकी आँखों में एक अजीब सी उदासी होती। लेकिन मैं उस समय इतना सेल्फिश था कि मैंने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया।
हफ्ते बीतते गए। मीरा रोज़ मेरे कमरे में आती, मुझसे बात करने की कोशिश करती, मुझे खाना खिलाने की कोशिश करती। कभी-कभी वह मेरे साथ बैठकर घंटों बात करती, मेरे दिल की बात सुनती। लेकिन मैं उसकी एक नहीं सुनता था।
“आरव, प्लीज़, अपने आप को संभालो। तुम्हारे भाई परेशान हैं, मम्मी-पापा परेशान हैं,” वह कहती।
“तो क्या करूँ मैं? नाटक करूँ कि सब ठीक है?” मैं ताने मारता।
“नहीं, लेकिन कम से कम अपनी लाइफ तो वापस लो। ऑफिस जाओ, दोस्तों से मिलो, जिंदगी जियो,” वह कहती।
मैं उसे घूरकर देखता और फिर पलट जाता।
लेकिन धीरे-धीरे, बिना जाने, मैंने मीरा को अपने करीब पाया। वह मेरी दोस्त बन गई। वह मुझे समझती थी, मेरे दर्द को समझती थी। और धीरे-धीरे, मैं भी उसकी बातें सुनने लगा।
साड़ी वाली भाभी की चुदाई : बदलाव की शुरुआत
लगभग दो महीने बीत चुके थे। मैं धीरे-धीरे अपने आप को संभाल रहा था। मीरा की मेहनत रंग ला रही थी। मैंने ऑफिस जाना शुरू कर दिया था, और मेरी मुस्कान वापस आ रही थी।
एक दिन रात को, मैं लेट नाइट काम करके घर आया। घर में सन्नाटा था। मेरे भाई और पेरेंट्स किसी रिश्तेदारी के कार्यक्रम में गए हुए थे, जो दूसरे शहर में था। वे अगले दिन वापस आने वाले थे। मीरा घर पर अकेली थी।
मैं जब अंदर आया, तो मीरा सोफे पर बैठी टीवी देख रही थी। वह एक साधारण सूट में थी, और उसके बाल खुले हुए थे।
“आरव, आ गए? खाना खाया?” उसने पूछा।
“हाँ भाभी, बाहर ही खा लिया,” मैंने कहा।
“आओ, बैठो थोड़ी देर। अकेली बोर हो रही हूँ,” उसने कहा।
मैं उसके पास बैठ गया। हम बातें करने लगे। पहली बार, हमने गहरी बातें कीं। उसने मुझसे पूछा कि मैं प्रिया के बारे में सोचता भी हूँ या नहीं।
“नहीं भाभी, अब नहीं। शायद वह मेरे लिए सही नहीं थी,” मैंने कहा।
“अच्छा हुआ तुम्हें यह समझ आया,” मीरा ने मुस्कुराते हुए कहा।
उस रात हमने बहुत देर तक बातें कीं। मुझे पता चला कि मीरा एक बेहद समझदार और mature लड़की थी। उसकी सोच बहुत स्पष्ट थी। और उस रात, पहली बार, मैंने मीरा को एक औरत की नज़र से देखा।
वह सूट में थी, लेकिन उसकी खूबसूरती… वह कुछ अलग थी। उसके चेहरे पर एक सादगी थी, लेकिन आँखों में एक गहराई थी। उसके होंठ… मैंने पहली बार नोटिस किए कि वह कितने खूबसूरत थे।
मैंने अपने आप को रोका। “यह क्या सोच रहा हूँ मैं? यह मेरी भाभी है!” मैंने अपने आप को डांटा।
लेकिन वह रात मेरी सोच बदलने की शुरुआत थी।
साड़ी में कातिलाना अदाएँ
अगले दिन सुबह, मैं नाश्ते की मेज पर बैठा था। मीरा रसोई से आई, और मैं जो देखा, उसे देखकर मेरी साँसें थम सी गईं।
वह एक पूरी पारंपरिक साड़ी में थी। गुलाबी रंग की बनारसी साड़ी, सुनहरी बॉर्डर के साथ। उसने गहरे गले का ब्लाउज पहना था, जो उसकी खूबसूरती को और बढ़ा रहा था। उसके बालों में गजरा था, और माथे पर एक छोटी सी बिंदी।
वह पूरी भारतीय नारी लग रही थी – सुंदर, सँवरी, और बेहद आकर्षक।
“गुड मॉर्निंग आरव,” उसने मुस्कुराते हुए कहा।
“गु… गुड मॉर्निंग भाभी,” मैं हकलाते हुए बोला।
मेरी आँखें उस पर टिकी हुई थीं। मैं उसे देखता ही रह गया। वह साड़ी में… वह कुछ और ही लग रही थी। उसकी कमर की लहराती हुई साड़ी, उसके हाथों में चूड़ियाँ, उसकी पीठ पर गहरे गले का ब्लाउज… सब कुछ इतना perfect था।
“क्या हुआ? कुछ चेहरे पर लिखा है?” मीरा ने पूछा, मेरी घूरती हुई नज़रें देखकर।
“नहीं… वो… आप बहुत सुंदर लग रही हैं,” मैंने बिना सोचे कह दिया।
मीरा थोड़ा शर्मा गई। “धन्यवाद। आज मेरे मायके से कुछ मेहमान आ रहे हैं, इसलिए पारंपरिक पहना है,” उसने समझाया।
लेकिन मैं उसकी बात सुन नहीं पा रहा था। मेरी नज़रें उसके ब्लाउज के गहरे गले पर टिकी हुई थीं, जहाँ से उसकी त्वचा का हल्का सा हिस्सा दिखाई दे रहा था। वह सोने की चेन जो उसने पहनी थी, उसके गले को और आकर्षक बना रही थी।
“आरव, खाना ठंडा हो रहा है,” उसने मुझे वापस लाया।
“हाँ… हाँ, सॉरी,” मैंने कहा।
उस दिन मैं ऑफिस नहीं जा पाया। मेरे दिमाग में सिर्फ मीरा का वह रूप था – साड़ी में, गजरे में, वह खूबसूरत ब्लाउज में।
नज़दीकियाँ बढ़ती हैं
उस दिन के बाद, मैं मीरा को अलग नज़र से देखने लगा। मैंने नोटिस किया कि वह अक्सर मुझे देखती थी, मुस्कुराती थी। कभी-कभी वह मेरे कमरे में आती और मेरे साथ बैठती।
एक दिन, मैं घर पर अकेला था। मीरा बाजार गई हुई थी। मैं उसके कमरे से गुज़रा, और दरवाज़ा खुला देखकर अंदर झाँका।
उसका कमरा बहुत सुंदर था – सजाया हुआ, साफ-सुथरा। मेरी नज़र उसके ड्रेसिंग टेबल पर पड़ी, जहाँ पर एक खुली हुई साड़ी रखी थी। वह हल्के नीले रंग की साड़ी थी, बहुत सॉफ्ट फैब्रिक की।
मैंने साड़ी को छुआ। वह इतनी सॉफ्ट थी, जैसे मीरा की त्वचा…
“आरव?” मीरा की आवाज़ से मैं चौंक गया।
वह दरवाज़े पर खड़ी थी, शॉपिंग बैग्स हाथ में लिए हुए।
“मैं… मैं सिर्फ…” मैं हकलाने लगा।
“कोई बात नहीं,” वह मुस्कुराई। “पसंद आई साड़ी?”
“बहुत,” मैंने कहा।
“तुम्हें पता है, यह मेरी पसंदीदा साड़ी है। मैं इसे खास मौकों पर पहनती हूँ,” उसने कहा, और फिर धीरे से कहा, “शायद कभी तुम्हारे लिए भी पहनूँ।”
मैं उसे देखता रहा। क्या उसने सच में यह कहा?
“मैं… मुझे जाना चाहिए,” मैंने कहा और वहाँ से निकल गया।
लेकिन उस रात, मैं सो नहीं पाया। मीरा की वह बात मेरे दिमाग में घूम रही थी। “शायद कभी तुम्हारे लिए भी पहनूँ।”
साड़ी वाली भाभी की चुदाई : दिल की बात
दिन बीतते गए, और मीरा और मेरे बीच की नज़दीकियाँ बढ़ती गईं। हम अक्सर रात को बैठकर बातें करते, कभी-कभी घंटों तक।
एक रात, मैं और मीरा छत पर बैठे थे। हवा चल रही थी, और चाँद पूरा था।
“आरव, क्या तुम मुझसे नाराज़ हो?” मीरा ने अचानक पूछा।
“नहीं भाभी, क्यों?” मैंने पूछा।
“क्योंकि पहले तुम मुझसे बहुत बातें करते थे, अब कम करने लगे हो,” उसने कहा।
“ऐसा नहीं है,” मैंने कहा।
“तो फिर क्या है? कुछ तो बदला है,” उसने कहा, और फिर धीरे से पूछा, “क्या तुम मुझसे दूर जा रहे हो?”
मैंने उसे देखा। चाँद की रोशनी में वह बेहद खूबसूरत लग रही थी। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी।
“मैं… मैं आपसे दूर नहीं जा रहा, भाभी। बस… बस थोड़ा व्यस्त हूँ,” मैंने झूठ बोला।
“आरव, मैं तुमसे एक बात कहना चाहती हूँ,” मीरा ने कहा, और उसकी आवाज़ थोड़ी कांप रही थी।
“क्या?” मैंने पूछा।
“मैं… मैंने हमेशा से तुम्हें…” वह रुक गई।
“क्या भाभी?” मैंने उत्सुकता से पूछा।
“कुछ नहीं,” उसने कहा और उठकर चली गई।
मैं वहीं बैठा रहा, सोचते हुए कि वह क्या कहना चाहती थी।
अगले दिन, मेरे भाई अनिरुद्ध को एक जरूरी काम से मुंबई जाना पड़ा। वह तीन दिन के लिए बाहर थे। घर में सिर्फ मैं और मीरा थे।
रात को, मैं अपने कमरे में था, जब मीरा दरवाज़े पर आई।
“आरव, मैं अंदर आ सकती हूँ?” उसने पूछा।
“हाँ भाभी, आइए,” मैंने कहा।
वह अंदर आई। वह एक रात की साड़ी में थी – हल्की, आरामदायक साड़ी, लेकिन फिर भी बेहद खूबसूरत। उसने अपने बाल खुले छोड़े हुए थे, और वह थोड़ी नर्वस लग रही थी।
“आरव, मुझे तुमसे कुछ ज़रूरी बात करनी है,” उसने कहा।
“कहिए,” मैंने कहा।
वह मेरे बिस्तर के पास बैठ गई। “आरव, मैंने जो कुछ भी किया, उसके लिए मुझे माफ़ कर दो।”
“क्या किया आपने?” मैंने पूछा।
“मैं… मैंने तुमसे शादी की,” उसने कहा, और उसकी आँखों में आँसू आ गए।
“क्या? मैं समझा नहीं,” मैंने कहा।
“आरव, सच यह है कि मैंने हमेशा से तुम्हें पसंद किया था। जब मेरी और अनिरुद्ध की बात चल रही थी, तब मैंने सोचा था कि मैं तुम्हें पहले मिली थी, लेकिन तब तुम प्रिया के साथ थे। और फिर… फिर मैंने सोचा कि शायद यही ठीक है। लेकिन अब…” वह रोने लगी।
मैं हैरान था। मैं कुछ समझ नहीं पा रहा था।
“आरव, मैं जानती हूँ कि यह गलत है। मैं तुम्हारी भाभी हूँ। लेकिन मैं अपने दिल को झूठ नहीं बोल सकती। मैंने हमेशा से तुम्हें प्यार किया है, और आज भी करती हूँ,” उसने कहा।
मैं उसे देखता रहा। मेरी धड़कन तेज़ हो गई थी। मैं भी उसे पसंद करने लगा था, लेकिन मैंने कभी इस बारे में सोचा नहीं था।
“भाभी, यह…” मैंने कहना शुरू किया।
“प्लीज़, मुझे भाभी मत कहो। आज रात, मैं सिर्फ मीरा हूँ। तुम्हारी मीरा,” उसने कहा।
और फिर, उसने कुछ ऐसा किया जिसकी मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी।
साड़ी वाली भाभी की चुदाई : पहली बार
मीरा ने अपने हाथ आगे बढ़ाए और मेरे चेहरे को छुआ। उसके हाथ ठंडे थे, लेकिन उसके छूने से मेरे शरीर में आग लग गई।
“आरव, क्या तुम मुझे पसंद करते हो?” उसने पूछा।
मैं कुछ नहीं बोल पाया। मैं बस उसे देखता रहा।
“मैं जानती हूँ कि यह गलत है। समाज यह नहीं मानेगा। लेकिन आज रात, हम दोनों अकेले हैं। कोई नहीं जानेगा। और मैं… मैं चाहती हूँ कि तुम…” उसने कहा, और फिर रुक गई।
“क्या?” मैंने धीरे से पूछा।
“आज try करना है तो कर ले इसके ऊपर,” उसने कहा, अपनी साड़ी की ओर इशारा करते हुए।
मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। क्या मीरा ने सच में यह कहा?
“मीरा…” मैंने कहा।
“हाँ आरव, मैं तुम्हारी हूँ। आज रात, मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ,” उसने कहा, और फिर उसने अपने हाथों से अपनी साड़ी का पल्लू हटाया।
वह साड़ी में इतनी खूबसूरत लग रही थी। उसका ब्लाउज उसके शरीर को बिल्कुल perfect तरीके से फिट कर रहा था। उसकी कमर, उसके कर्व्स… सब कुछ इतना आकर्षक था।
“मीरा, हमें यह नहीं करना चाहिए,” मैंने कहा, लेकिन मेरा दिल मना कर रहा था।
“क्यों? क्योंकि मैं तुम्हारी भाभी हूँ? आरव, हम दोनों जानते हैं कि हम एक-दूसरे के लिए बने हैं। यह रिश्ता, यह नाता… यह सब झूठ है। सच तो यह है कि मैं तुमसे प्यार करती हूँ,” उसने कहा।
और फिर, वह खड़ी हुई और मेरे करीब आई। उसने अपने हाथ मेरे कंधों पर रखे और मुझे अपनी ओर खींचा।
“आरव, प्लीज़,” उसने धीरे से कहा।
मैं टूट गया। मैंने अपने हाथ उसकी कमर पर रखे और उसे अपनी ओर खींचा। वह मेरे करीब आ गई, इतनी करीब कि मैं उसकी साँसें महसूस कर सकता था।
“मैं भी तुमसे प्यार करता हूँ, मीरा,” मैंने धीरे से कहा।
उसकी आँखों में खुशी के आँसू आ गए। और फिर, हमारे होंठ एक-दूसरे को ढूंढ लिए।
जब साड़ी बोलने लगी
मीरा मेरे बिस्तर पर लेटी हुई थी, और मैं उसके ऊपर झुका हुआ था। कमरे में सिर्फ एक दीया जल रहा था, जिसकी लौ हवा में थरथरा रही थी। उसकी छायाएँ दीवारों पर नाच रही थीं, और मीरा का चेहरा उस रोशनी में किसी अप्सरा से कम नहीं लग रहा था।
“धीरे-धीरे खोलना… मैंने यह साड़ी खास तुम्हारे लिए पहनी है,” मीरा ने शर्माते हुए कहा, उसकी आवाज़ में एक अजीब सी कशिश थी।
मैंने उसकी आँखों में देखा। वह इंतज़ार कर रही थी, हर पल को जी रही थी। मैंने अपने हाथ उसकी साड़ी की ओर बढ़ाए।
साड़ी एक गहरे हरे रंग की बनारसी थी, सुनहरे जरी के काम के साथ। उसका पल्लू हल्का सा उसके सीने पर पड़ा हुआ था, जो उसके ब्लाउज के गहरे गले को और भी आकर्षक बना रहा था।
मैंने धीरे से पल्लू का कोना पकड़ा। मेरी उंगलियाँ उसके कपड़े को छू रही थीं, और मीरा की साँसें तेज़ हो गईं। मैंने धीरे से खींचा, और पल्लू धीरे-धीरे उसके शरीर से खिसकने लगा।
जैसे ही पल्लू खुला, मीरा का ब्लाउज पूरी तरह से दिखाई देने लगा। वह एक गहरे हरे रंग का ब्लाउज था, सुनहरी पाइपिंग के साथ, और गहरे गले का कट जो उसकी त्वचा को बेहद खूबसूरती से ढक रहा था।
“ओह…” मीरा ने हल्की सी आवाज़ निकाली जब पल्लू पूरी तरह से खुल गया।
अब मीरा का ब्लाउज और पेटीकोट साफ़ दिख रहे थे। उसकी कमर बेहद पतली थी, और साड़ी का नीचे का हिस्सा उसकी नाभि के पास बँधा हुआ था।
मैंने अपने हाथ उसकी कमर पर रखे। उसकी त्वचा गर्म थी, और साड़ी के ऊपर से ही मैं उसकी धड़कन महसूस कर सकता था।
“डर लग रहा है?” मैंने पूछा।
“नहीं… बस… बहुत उत्साहित हूँ,” उसने कहा, अपनी आँखें बंद करते हुए।
साड़ी वाली भाभी की चुदाई : ब्लाउज की बटनियाँ
मैंने अब उसके ब्लाउज की ओर ध्यान दिया। वह ब्लाउज तीन बटनियों का था, और हर बटनी सुनहरे धागे से बुनी हुई थी। मीरा का हाथ अपने पेट पर था, जैसे वह अपने आप को संभाल रही हो।
“मैं खोलूँ?” मैंने पूछा।
“हाँ… प्लीज़,” उसने धीरे से कहा।
मैंने पहली बटनी पकड़ी। वह कसी हुई थी, और जैसे ही मैंने उसे खोला, ब्लाउज थोड़ा सा खुल गया। अंदर से एक हल्की सी लेस की ब्रा दिखाई दी, जो उसकी त्वचा पर चमक रही थी।
“तुम… तुम बहुत खूबसूरत हो,” मैंने कहा।
मीरा ने शर्म से अपना चेहरा एक तरफ कर लिया। “धीरे-धीरे करो… हर पल को महसूस करो,” उसने कहा।
मैंने दूसरी बटनी खोली। अब ब्लाउज और खुल गया, और उसकी ब्रा का ऊपरी हिस्सा दिखाई देने लगा। उसकी त्वचा इतनी सॉफ्ट थी, इतनी गोरी, जैसे कोई मोती हो।
“आखिरी बटनी…” मीरा ने धीरे से कहा।
मैंने तीसरी बटनी को अपनी उंगलियों से छुआ। वह गर्म थी, मीरा की साँसों की गर्मी से। मैंने धीरे से उसे खोला, और ब्लाउज पूरी तरह से खुल गया।
मीरा ने अपने हाथों से अपने ब्लाउज को पकड़े रखा, जैसे अभी भी शर्मा रही हो।
“खोल दो…” मैंने कहा।
उसने धीरे से अपने हाथ हटाए, और ब्लाउज खुलकर बिस्तर पर गिर गया।
पहली छुअन
अब मीरा ऊपर से ब्रा में थी। वह एक हल्की हरी लेस की ब्रा थी, जो उसके ब्रेस्ट्स को बेहद खूबसूरती से ढक रही थी।
मैंने अपने हाथ उसके कंधों पर रखे। उसकी त्वचा मक्खन जैसी सॉफ्ट थी। मैंने धीरे से अपने हाथ नीचे की ओर लाए, उसके गले को छुआ, फिर उसके कॉलर बोन्स को, और फिर…
मैंने पहली बार उसकी ब्रा को छुआ। वह कपड़ा इतना नरम था, और उसके नीचे जो गोलाई थी… वह बेहद आकर्षक थी।
“आरव…” मीरा ने मेरा नाम धीरे से लिया।
मैंने उसकी ब्रा के पीछे का हुक ढूंढा। वह उसकी पीठ पर था, और मैंने एक हाथ से उसे खोलने की कोशिश की। मीरा ने अपनी पीठ थोड़ी उठाई ताकि मैं आसानी से खोल सकूँ।
क्लिक की आवाज़ हुई, और ब्रा ढीली हो गई।
“अब तुम…” मीरा ने कहा।
मैंने धीरे से ब्रा के स्ट्रैप्स उसके कंधों से नीचे किए। वह धीरे-धीरे खुलती गई, और फिर…
वह क्षण। मीरा के ब्रेस्ट्स पहली बार मेरी नज़रों के सामने थे। वह गोल, सॉफ्ट, गुलाबी निप्पल्स के साथ… वह कुछ और ही थे।
“तुम… तुम बहुत सुंदर हो,” मैंने कहा, और मेरी आवाज़ कांप रही थी। और हमें देसी भाभी की चुदाई का मजा अलग है
मीरा ने अपने हाथों से अपने ब्रेस्ट्स को छुपाने की कोशिश की, लेकिन मैंने धीरे से उसके हाथ हटाए।
“मत छुपाओ… मुझे देखने दो,” मैंने कहा।
मैंने अपने हाथ उसके ब्रेस्ट्स की ओर बढ़ाए। धीरे-धीरे, जैसे कोई कीमती चीज़ छू रहा हो। मेरी उंगलियाँ उसकी त्वचा को छूईं, और मीरा ने एक गहरी साँस ली।
“ओह गॉड… यह… यह कितना अच्छा लग रहा है,” उसने कहा।
मैंने धीरे से एक ब्रेस्ट को अपने हाथ में लिया। वह इतना सॉफ्ट था, इतना नरम, जैसे कोई गुलाब का फूल हो। मैंने धीरे से दबाया, और मीरा की साँसें और तेज़ हो गईं।
“आरव… प्लीज़… और करो,” उसने कहा।
मैंने दोनों हाथों से उसके ब्रेस्ट्स को सहलाना शुरू किया। धीरे-धीरे, गोलाकार घुमाते हुए। मीरा की आँखें बंद थीं, और वह हर स्पर्श का आनंद ले रही थी।
फिर मैंने नीचे झुका और उसके एक ब्रेस्ट को चूमा। उसकी त्वचा मीठी थी, इतनी सॉफ्ट… मैंने धीरे से अपनी जीभ से उसके निप्पल को छुआ।
“आह…” मीरा ने एक मीठी सी आवाज़ निकाली।
मैंने उसे और अंदर मुँह में लिया, और चूसने लगा। मीरा का शरीर कांपने लगा, उसने अपने हाथ मेरे बालों में फेरे और मुझे और अपनी ओर दबाया।
“हाँ… ऐसे ही… और करो,” वह फुसफुसा रही थी।
नीचे का सफर
मैं धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ा। मीरा का पेट, उसकी नाभि… मैंने हर जगह चूमा। उसकी त्वचा की खुशबू मेरे सिर में चढ़ रही थी – एक मीठी सी, केसर और गुलाब की खुशबू।
अब बारी थी उसके पेटीकोट की। मीरा ने हरे रंग का पेटीकोट पहना हुआ था, जो उसकी साड़ी से मैच कर रहा था।
“यह भी खोल दूँ?” मैंने पूछा।
मीरा ने शर्माते हुए हाँ में सिर हिलाया।
मैंने उसके पेटीकोट की डोरी ढूंढी। वह उसकी कमर के एक तरफ बंधी हुई थी। मैंने धीरे से खींचा, और डोरी खुल गई।
पेटीकोट ढीला हो गया, और मैंने धीरे से उसे नीचे किया। मीरा ने अपनी कमर थोड़ी उठाई, और मैंने पेटीकोट उतार दिया।
अब मीरा सिर्फ अपनी अंडरगारमेंट्स में थी। वह एक हल्की हरी लेस की पैंटी थी, जो उसके शरीर को बेहद खूबसूरती से ढक रही थी।
“तुम… तुम इतनी सुंदर हो,” मैंने कहा।
मीरा ने अपने हाथों से अपने चेहरे को ढक लिया। “शर्मा रही हूँ…” उसने कहा।
“मत शर्माओ… तुम मेरी हो,” मैंने कहा, और उसके हाथों को हटाया।
अंतिम परत
मैंने अब उसकी पैंटी की ओर ध्यान दिया। वह लेस की थी, और थोड़ी सी पारदर्शी। मीरा का शरीर उसके नीचे से झलक रहा था।
“यह… यह भी खोलूँ?” मैंने पूछा, मेरी साँसें तेज़ हो रही थीं।
“हाँ… प्लीज़… मैं तुम्हारी हूँ, आरव। आज पूरी तरह से तुम्हारी,” मीरा ने कहा।
मैंने धीरे से पैंटी के किनारों को पकड़ा। मेरी उंगलियाँ उसकी त्वचा को छू रही थीं – उसकी जाँघें इतनी सॉफ्ट थीं। मैंने धीरे से पैंटी नीचे की ओर की।
जैसे-जैसे पैंटी नीचे आती गई, मीरा की त्वचा सामने आती गई। वह बिल्कुल स्मूथ थी, बिल्कुल साफ़। और फिर…
पैंटी पूरी तरह से उतर गई। और मीरा… मीरा पूरी तरह से नंगी थी, मेरे सामने, मेरे बिस्तर पर।
“अब तुम भी…” उसने कहा, मेरी ओर देखते हुए।
मैंने जल्दी से अपने कपड़े उतारे। मीरा ने मुझे देखा, और उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी – प्यार, इच्छा, और बेकरारी का मिश्रण।
मैं वापस मीरा के ऊपर आया। अब हम दोनों पूरी तरह से नंगे थे, एक-दूसरे की बाहों में।
मैंने उसके शरीर को अपने शरीर से छुआया। हमारी त्वचाएँ मिल रही थीं, और वह एहसास… वह कुछ और ही था।
“आरव… मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ,” मीरा ने कहा, उसकी आँखों में आँसू थे।
“मैं भी, मीरा। बहुत ज़्यादा,” मैंने कहा, और उसे किस किया।
हमारे शरीर एक-दूसरे से रगड़ रहे थे। मीरा की साँसें तेज़ हो गई थीं, और वह मुझे कसकर पकड़े हुए थी।
“अब… अब करो,” उसने धीरे से कहा।
मैंने धीरे से अपने शरीर को उसके साथ अलाइन किया। मीरा ने अपनी टांगें थोड़ी खोलीं, और मैं…
वह क्षण। जब हम एक हो गए। मीरा ने एक गहरी साँस ली, और उसकी आँखें बंद हो गईं।
“ओह… आरव… यह… यह बहुत…” वह कुछ कह नहीं पाई।
मैं भी उस क्षण को महसूस कर रहा था। वह गर्मी, वह नमी, वह कसावट… यह सब कुछ और ही था।
“तुम ठीक हो?” मैंने पूछा।
“हाँ… बस… धीरे-धीरे,” उसने कहा।
रिदम ऑफ लव
मैंने धीरे-धीरे हिलना शुरू किया। मीरा के शरीर के साथ तालमेल बिठाते हुए। हर बार जब मैं अंदर जाता, मीरा एक मीठी सी आवाज़ निकालती।
“आह… हाँ… ऐसे ही,” वह कहती।
मैंने अपने हाथ उसके ब्रेस्ट्स पर रखे, और हिलते हुए उन्हें सहलाता रहा। मीरा का शरीर मेरे नीचे कांप रहा था, और वह मुझे अपनी टांगों से कसे हुए थी।
“और तेज़… प्लीज़… और तेज़,” उसने कहा।
मैंने अपनी स्पीड बढ़ाई। अब हम दोनों एक रिदम में थे। बिस्तर की चरमराहट, हमारी साँसों की आवाज़, और मीरा की मीठी सिसकियाँ… यह सब कमरे में गूंज रहा था।
“आरव… मैं… मैं बहुत करीब हूँ,” मीरा ने कहा, उसका चेहरा लाल हो गया था।
“मैं भी… एक साथ…” मैंने कहा।
और फिर… वह क्षण आया। जब हम दोनों एक साथ ऊँचाई पर पहुँचे। मीरा ने मुझे कसकर पकड़ा, उसकी पूरी बॉडी सिकुड़ गई, और मैं… मैं भी उसी पल…
हम दोनों एक-दूसरे में खो गए। वह एहसास… जैसे समय थम गया हो। जैसे दुनिया सिर्फ हम दोनों की हो।
बाद का प्यार
जब हम दोनों ने अपने आप को संभाला, तो मीरा मेरी बाँहों में थी। उसने अपना सिर मेरे सीने पर रखा हुआ था, और मैं उसके बालों को सहला रहा था।
“यह… यह कितना सुंदर था,” मीरा ने धीरे से कहा।
“हाँ… तुम बहुत अच्छी हो,” मैंने कहा।
“मैंने कभी सोचा नहीं था कि यह इतना खूबसूरत हो सकता है,” उसने कहा।
मैंने उसे कसकर गले लगाया। “मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ, मीरा। हमेशा।”
हम दोनों एक-दूसरे की बाहों में लेटे रहे। उसकी साड़ी, जो अब बिस्तर पर बिखरी हुई थी, वह हमारे प्यार की गवाह थी।
“वह साड़ी…” मीरा ने कहा।
“हाँ?”
“मैं चाहती हूँ कि तुम उसे संभाल कर रखो। याद के तौर पर,” उसने कहा।
मैंने मुस्कुराते हुए हाँ में सिर हिलाया।
रात भर का सफर
उस रात हमने कई बार प्यार किया। हर बार, नए तरीके से, नए अंदाज़ में।
एक बार, मीरा ने मुझे अपने ऊपर आने दिया, और वह मेरी सवारी करती रही। उसकी साड़ी का पल्लू उसने अपने शरीर पर लपेट रखा था, और वह उसे धीरे-धीरे खोलती रही जबकि हम एक-दूसरे से जुड़े हुए थे। ये हकीकत में एक इंडियन हाउसवाइफ सेक्स की है
“तुम्हें पता है, मुझे सबसे अच्छा लगता है जब तुम मेरी साड़ी में होते हो,” मीरा ने कहा। ये साड़ी ब्लाउज वाली भाभी का देवर की चुदाई का पल ।
“क्यों?” मैंने पूछा।
“क्योंकि तब मुझे लगता है कि मैं पूरी तरह से भारतीय नारी हूँ, और तुम मेरे पति हो,” उसने कहा।
मैंने उसे किस किया। “तुम मेरी पत्नी हो, मीरा। दिल से, रूह से।”
दूसरी बार, हमने साइड में किया, एक-दूसरे को गले लगाए हुए। मीरा की पीठ मेरी छाती से सटी हुई थी, और मैं उसके पीछे से उससे जुड़ा हुआ था। यह पोज़िशन उसे बहुत पसंद आई।
“यह… यह बहुत गहरा लग रहा है,” उसने कहा।
“अच्छा लग रहा है?” मैंने पूछा।
“बहुत… बहुत ज़्यादा,” उसने कहा।
सुबह जब सूरज की पहली किरण खिड़की से अंदर आई, तो मीरा और मैं फिर से एक-दूसरे के करीब थे।
वह अभी भी नंगी थी, और उसने अपनी साड़ी को आंशिक रूप से ओढ़ रखा था। सूरज की रोशनी में, वह सोने की देवी लग रही थी।
“सुबह हो गई,” उसने कहा।
“हाँ… लेकिन अभी तो हमारी रात खत्म नहीं हुई,” मैंने कहा, और उसे अपनी ओर खींचा हा तुम मेरी हॉट देसी भाभी हो और हम हँसने लगे और।
हमने फिर से प्यार किया, इस बार धीमी गति से, जैसे समय हमारे पास हो। हर स्पर्श को महसूस करते हुए, हर साँस को साझा करते हुए।
जब हम खत्म हुए, तो मीरा मेरी छाती पर अपना सिर रखे लेटी थी।
“मैं खुश हूँ, आरव। बहुत खुश,” उसने कहा।
“मैं भी, मेरी जान। तुम्हारे बिना मेरी जिंदगी अधूरी है,” मैंने कहा।
साड़ी की खुशबू
जब हम उठे, मीरा ने अपनी वही साड़ी उठाई। वह अब थोड़ी सी क्रंपल्ड थी, लेकिन फिर भी उतनी ही खूबसूरत।
“इसमें तुम्हारी खुशबू है अब,” मीरा ने कहा, साड़ी को अपने चेहरे पर लगाते हुए।
“और इसमें तुम्हारी है,” मैंने कहा, उसे अपनी ओर खींचते हुए। जिसे देख मेरे मन में साड़ी वाली भाभी की चुदाई की चाहत बन गई ।
हमने एक-दूसरे को किस किया, और फिर मीरा ने वह साड़ी पहनने की कोशिश की। मैंने उसकी मदद की, और जैसे-जैसे वह साड़ी को लपेटती गई, वह फिर से वही खूबसूरत भाभी बनती गई जो मैंने पहली बार देखी थी।
“कैसी लग रही हूँ?” उसने पूछा।
“जैसे कोई सपना,” मैंने कहा।
“तुम्हारा सपना,” उसने कहा, और मुस्कुराई।
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