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Indian Bhabhi Sex Stories – Desi Hot Bhabhi Stories in Hindi
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Indian Bhabhi Sex Stories – Desi Hot Bhabhi Stories in Hindi

Indian Bhabhi Sex

सावन में भीगी भाभी की चुदाई

Desi Bhabhi Chudai, August 6, 2026September 22, 2026
सावन में भीगी भाभी की चुदाई

मौसम का मस्त मिजाज और भीगी भाभी की चुदाई का आगाज

आसमान में काले-काले बादल मंडरा रहे थे। पूरा माहौल एक अलग ही रंग में रंगा हुआ था। सावन का महीना था और बारिश का मौसम अपने पूरे शबाब पर था। मैं, विकास, अपने फ्लैट की बालकनी में खड़ा होकर इस मनमोहक मौसम का आनंद ले रहा था। मेरी उम्र 26 साल की थी और मैं अपने भाई के फ्लैट में उनके साथ रहता था। मैं हमेशा से भीगी भाभी की चुदाई के बारे में सोचता था।

मेरे भाई अनिल की शादी को दो साल हो चुके थे। उनकी पत्नी अंशिका, जिसे मैं प्यार से भाभी कहता था, एक बेहद खूबसूरत औरत थी। उनकी उम्र 28 साल थी और उनका रूप ऐसा कि कोई भी उन्हें देखकर मुग्ध हो जाए। गोरा रंग, भरे हुए बदन, 36-28-38 का फिगर और वो मादक अदाएं—सब कुछ ऐसा था कि मेरे लिए उन्हें देखना हर रोज एक तरह की यातना बना गया था।

उस दिन शाम का वक्त था। मैंने हल्की सी शर्ट और शॉर्ट्स पहने हुए थे। बालकनी में खड़े होकर मैं चाय की चुस्कियां ले रहा था और बारिश के इंतजार में था। अचानक दरवाजे पर जोरदार दस्तक हुई।

“कौन हो सकता है इस वक्त?” मैंने सोचा।

मैंने दरवाजा खोला तो सामने का नजारा देखकर मैं एक पल के लिए ठिठक गया। वहां अंशिका भाभी खड़ी थीं, लेकिन वो हालत में जिसे देखकर मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा। पूरी तरह से भीगी हुई भाभी—बालों से पानी की बूंदें टपक रही थीं, वो काली साड़ी और लाल ब्लाउज जिसकी वो पूरी भीगी हुई थी तो सब चिपक गई थी सारे और वो मुझे कुछ कह रही हो मुझे ऐसा लगा कि तुम मुझे उतारो ऐसा महसूस करो मुझे आने लगी उनके शरीर पर और उनके अंदरूनी कपड़ों की आकृति साफ-साफ दिखाई दे रही थी।

“विकास… रास्ते में अचानक इतनी तेज बारिश शुरू हो गई और मेरा फोन भी स्विच ऑफ हो गया। इसलिए मैं यहां रुकने आ गई,” अंशिका भाभी ने कपड़े झटकते हुए कहा। उनकी आवाज में थकावट और परेशानी साफ झलक रही थी।

मैं उन्हें देखता ही रह गया। ये वही भाभी थीं जो हमेशा साड़ी में पूरी तरह से ढकी रहती थीं, लेकिन आज बारिश में भीगी भाभी का यह रूप—यह तो किसी अप्सरा से कम नहीं था। उनके गोरे गालों पर पानी की बूंदें चमक रही थीं, गीले बाल उनके चेहरे पर चिपके हुए थे और वो साड़ी जो उनके शरीर की हर उभार को उजागर कर रही थी—यह नजारा मेरे लिए एक तरह का जन्नत था।

“अरे भाभी, आप तो पूरी तरह से भीग गई हैं! आइए जल्दी अंदर आइए,” मैंने होश संभालते हुए कहा और उन्हें अंदर बुलाया।

मैंने तुरंत एक सूखा तौलिया उनकी तरफ बढ़ाया। वो तौलिया लेते हुए मेरी आंखों में एक पल के लिए देखा और शर्माते हुए नजरें झुका लीं। शायद वो महसूस कर रही थीं कि उनकी यह हालत मेरे लिए कितनी मुश्किल भरी हो सकती है।

मेरे दिमाग में पहले से ही एक शातिर प्लान चल रहा था। मैं जानता था कि अंशिका भाभी को सीधे तरीके से आकर्षित करना मुश्किल है। वो हमेशा से थोड़ी सी रिजर्व रहती थीं और भैया के प्रति पूरी तरह से वफादार। लेकिन आज का यह मौसम, यह बारिश और उनकी यह हालत—यह मेरे लिए एक सुनहरा मौका था।

“भाभी, आप बेहद परेशान लग रही हैं। आप फ्रेश हो जाइए, मैं आपके लिए स्पेशल गर्म अदरक की चाय बनाता हूं,” मैंने बेहद अपनापन और इज्जत दिखाते हुए कहा।

अंशिका भाभी ने मुस्कुराते हुए कहा, “धन्यवाद विकास, तुम तो बहुत अच्छे हो।”

मैंने उन्हें बाथरूम की तरफ इशारा किया जहां वो अपने गीले कपड़ों को थोड़ा सुखा सकें। इस बीच मैं रसोई में गया और चाय बनाने की तैयारी शुरू की। लेकिन मेरे दिमाग में कुछ और ही चल रहा था।

मैंने अलमारी से एक छोटी सी गोली निकाली—यह एक हल्की सी रिलैक्सेंट थी जो नींद लाने में मदद करती थी। मैंने इसे बहुत सावधानी से चाय में मिला दिया, इतनी मात्रा में कि उनका दिमाग थोड़ा हल्का हो जाए और उनका सेल्फ-कंट्रोल कमजोर पड़ जाए, लेकिन इतनी भी नहीं कि उन्हें कुछ होश ही न रहे।

चाय का कप लेकर मैं लिविंग रूम में आया। अंशिका भाभी सोफे पर बैठी थीं, अभी भी उन्हीं गीले कपड़ों में। उनके बाल अभी भी गीले थे और वो तौलिए से उन्हें पोंछ रही थीं।

“भाभी, यह लीजिए गर्मागर्म चाय,” मैंने कप उन्हें देते हुए कहा।

“धन्यवाद विकास,” उन्होंने कप लिया और एक घूंट लिया।

मैं उनके पास बैठ गया और बेहद मीठी बातें शुरू कीं। “भाभी, भैया तो हमेशा काम में बिजी रहते हैं, आपका खयाल ही नहीं रखते। आप जैसी खूबसूरत और समझदार लड़की को तो पूरी अटेंशन मिलनी चाहिए।”

अंशिका भाभी ने मेरी तरफ देखा और थोड़ी उदास होते हुए कहा, “तुम्हें क्या बताऊं विकास, तुम्हारे भैया को तो ऑफिस ही उनकी पहली पत्नी लगती है।”

“अरे भाभी, आप ऐसा मत कहिए। आप तो हमारे घर की शान हैं। मैं तो कहता हूं कि भैया को समझ नहीं है कि उनके पास क्या खजाना है,” मैंने उनकी तारीफ करते हुए कहा।

चाय पीते ही अंशिका भाभी को एक अजीब सा सुकून महसूस होने लगा। उनकी आंखें थोड़ी लाल होने लगीं और उनका बदन थोड़ा ढीला पड़ने लगा। मौसम की ठंडक और मेरी मीठी, तारीफ भरी बातों ने उनके अंदर के डिफेंसिव मास्क को तोड़ना शुरू कर दिया था।

“विकास… तुम बहुत अच्छे हो। काश तुम्हारे भैया भी तुम्हारी तरह बातें समझते,” अंशिका भाभी ने थोड़ी लड़खड़ाती आवाज में कहा।

मैंने इस मौके का फायदा उठाया। मैं धीरे से उनके करीब बैठा और उनका हाथ अपने हाथों में ले लिया। उनके हाथ ठंडे थे और कांप रहे थे।

“भाभी, मैं हूं ना आपके साथ…” मैंने धीरे से कहा और उनके हाथों को सहलाने लगा।

अंशिका भाभी, जो पहले किसी को पास नहीं आने देती थीं, उस नशे और मेरे मीठे जाल में आकर शर्माते हुए पीछे नहीं हटीं। उनकी आंखें बंद होने लगी थीं और उनका सांस लेना भारी हो रहा था।

मैंने उनके गालों से पानी की बूंद को साफ करते हुए उनके करीब झुका। उनकी सांसों की गर्माहट मेरे चेहरे पर महसूस हो रही थी। वो अपनी आंखें बंद किए बैठी थीं और उनके होंठ कांप रहे थे।

“भाभी…” मैंने धीरे से फुसफुसाते हुए कहा।

उन्होंने आंखें नहीं खोलीं। मैंने हिम्मत करके उनके होठों पर एक हल्का सा किस कर दिया। वो एकदम से कांप उठीं और अपनी आंखें खोलकर मेरी तरफ देखने लगीं। लेकिन उन्होंने मुझे रोका नहीं।

मैंने फिर से उनके होठों पर किस किया, इस बार थोड़ी देर के लिए। अंशिका भाभी ने हल्की सी आह भरते हुए अपनी आंखें बंद कर लीं और मेरे कंधे पर सर टिका दिया। उनका यह रूप देखकर मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा।

“विकास… यह सही नहीं है…” उन्होंने धीरे से कहा, लेकिन उनकी आवाज में वो दृढ़ता नहीं थी जो पहले हुआ करती थी।

“भाभी, आज मौसम भी हमारे साथ है। देखिए ना, यह बारिश, यह ठंड—सब कुछ तो रोमांस मांग रहा है,” मैंने उनके कान में फुसफुसाते हुए कहा।

मैंने उनके गीले बालों को सहलाना शुरू किया। मेरे हाथ धीरे-धीरे उनकी पीठ पर चलने लगे। उनकी साड़ी अभी भी गीली थी और उनके शरीर की गर्माहट उसके माध्यम से मुझे महसूस हो रही थी।

“विकास… प्लीज…” उन्होंने कहा, लेकिन यह कहते हुए भी वो मुझे दूर नहीं धकेल रही थीं।

मैंने उनके गालों पर किस करना शुरू किया। धीरे-धीरे मेरे होंठ उनके गर्दन की तरफ बढ़ने लगे। उन्होंने अपना सर पीछे की ओर झुका दिया और मुझे और जगह दे दी।

“आह… विकास…” उनकी हल्की सी सिसकी निकली।

मेरे हाथ अब उनकी कमर को सहला रहे थे। मैंने धीरे से उनकी साड़ी के पल्लू को खींचना शुरू किया। वो एकदम से सकपका गईं।

“विकास, यह…” उन्होंने कहा।

“शhh… भाभी, आज बस आप मुझे अपने पास आने दीजिए। मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं,” मैंने उन्हें चुप कराते हुए कहा।

उनकी आंखों में एक अजीब सा नशा था। शायद वो चाय का असर था, या फिर मौसम का, या फिर मेरी बातों का—लेकिन वो अब रुकने के मूड में नहीं लग रही थीं।

मैंने उनकी साड़ी का पल्लू पूरी तरह से हटा दिया। अब वो केवल ब्लाउज और पेटीकोट में थीं। उनका गीला ब्लाउज उनके शरीर पर चिपका हुआ था और अंदर के ब्रा का रंग साफ दिखाई दे रहा था।

“वाह भाभी, आप तो बहुत खूबसूरत हैं,” मैंने उनकी तारीफ करते हुए कहा।

उन्होंने शर्माते हुए अपनी आंखें नीचे कर लीं। मैंने उनका चेहरा ऊपर उठाया और उनके होठों पर एक गहरा किस किया। इस बार उन्होंने भी थोड़ा सा रिस्पॉन्स दिया और मेरे बालों में हाथ फिराने लगीं।

हमारे बीच का यह खेल अब रुकने वाला नहीं था।

बारिश में भीगी भाभी की चुदाई का आगाज

मैंने उन्हें धीरे से सोफे पर लिटा दिया। वो मेरे नीचे आ गईं और मेरी आंखों में देखने लगीं। उनकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी—शर्म और वासना का मिश्रण।

“विकास… हमें यह नहीं करना चाहिए… हम गुनहगार बन जाएंगे…” उन्होंने धीरे से कहा।

“भाभी, प्यार कोई गुनाह नहीं है। और आज तो यह मौसम भी हमारे प्यार को स्वीकार कर रहा है,” मैंने कहते हुए उनके ब्लाउज के बटन खोलने शुरू किए। अब मुझे अपनी भाभी की चुदाई करने का मन कर गया

एक-एक करके मैंने उनके ब्लाउज के सारे बटन खोल दिए। अब वो केवल ब्रा में थीं। उनका गोरा बदन और गुलाबी ब्रा का यह नजारा मेरे लिए एक स्वर्ग से कम नहीं था।

“ओह भाभी…” मैंने उनके बदन को देखते हुए कहा।

मैंने उनकी ब्रा के ऊपर से ही उनके स्तनों को सहलाना शुरू किया। वो मचल उठीं और अपनी आंखें बंद कर लीं। मैंने धीरे से उनकी ब्रा का हुक खोला और उनके स्तनों को आजाद कर दिया।

क्या खूबसूरत स्तन थे उनके—गोल-गोल, कसे हुए, और बिल्कुल गुलाबी निपल्स। मैं उन्हें देखता ही रह गया।

“विकास… प्लीज… ऐसे मत देखो… शर्म आ रही है…” उन्होंने अपने हाथों से अपने स्तनों को ढकने की कोशिश की।

मैंने उनके हाथ हटा दिए और कहा, “भाभी, आपके इस खूबसूरत बदन को छिपाना पाप है। यह तो देखने के लिए बना है।”

कहते हुए मैंने उनके एक स्तन को अपने हाथ में ले लिया और दबाना शुरू कर दिया। वो आहें भरने लगीं। मैंने झुककर उनके निपल को मुंह में ले लिया और चूसने लगा।

“आह… हां… विकास… ओह…” उनकी सिसकियां बढ़ने लगीं।

मैं एक स्तन को चूस रहा था और दूसरे को अपने हाथ से मसल रहा था। अंशिका भाभी पूरी तरह से गर्म हो चुकी थीं। उनका शरीर अकड़ने लगा था और वो मेरे सिर को अपने स्तनों पर दबा रही थीं।

“ओह विकास… बहुत मजा आ रहा है… और करो… प्लीज…” वो बड़बड़ाने लगीं।

मैंने उनके दोनों स्तनों को बारी-बारी से चूसा। कभी दायां तो कभी बायां। उनके निपल्स अब कड़े हो चुके थे और वो पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थीं।

इसके बाद मैंने उनके पेटीकोट का नाड़ा खोला। वो एकदम से घबरा गईं।

“विकास… रुको… यह बहुत आगे बढ़ रहा है…” उन्होंने कहा।

“भाभी, अब रुकना मुश्किल है। आप भी तो यही चाहती हैं ना?” मैंने उनसे पूछा।

उन्होंने कुछ नहीं कहा, बस शर्माते हुए अपनी आंखें नीचे कर लीं। मैंने उनकी चुप्पी को हां समझा और उनका पेटीकोट पूरी तरह से उतार दिया।

अब वो केवल पैंटी में थीं। उनके गोरे-गोरे जांघें मेरे सामने थीं। मैंने उनके पैरों को सहलाना शुरू किया और धीरे-धीरे ऊपर की तरफ बढ़ने लगा।

“विकास… प्लीज… धीरे…” उन्होंने कहा।

मैंने उनकी पैंटी के ऊपर से ही उनकी योनि को सहलाना शुरू किया। वो कांप उठीं और अपने नितंब ऊपर उठा दिए। मैं समझ गया कि वो अब तैयार हैं।

मैंने उनकी पैंटी को नीचे खींचा और उनके योनि को देखा। वो बिल्कुल साफ शेव थी और बहुत ही खूबसूरत लग रही थी।

“भाभी, आपकी यह जगह तो बहुत खूबसूरत है,” मैंने कहा।

उन्होंने शर्म से पूरी लाल हो गईं। मैंने उनके योनि पर हाथ फेरा और उनकी योनि के दरवाजे को छूने लगा। वो गीली हो चुकी थीं और उनकी योनि से प्यार का रस बह रहा था।

मैंने एक उंगली अंदर डालने की कोशिश की। वो थोड़ा दर्द महसूस करने लगीं क्योंकि शायद वो पूरी तरह से तैयार नहीं थीं।

“दर्द हो रहा है भाभी?” मैंने पूछा।

“हां… थोड़ा… लेकिन चलो…” उन्होंने कहा।

मैंने धीरे-धीरे अपनी उंगली को अंदर-बाहर करना शुरू किया। वो धीरे-धीरे ढीली होने लगीं और मजा लेने लगीं।

“ओह… विकास… यह बहुत अच्छा लग रहा है…” वो बड़बड़ाने लगीं।

मैंने अब दो उंगलियां अंदर डाल दीं और उनकी योनि को चोदने लगा। वो अपने नितंब ऊपर-नीचे करने लगीं और जोर-जोर से सांसें लेने लगीं।

गहरे संबंध की स्थापना

मैंने अपने कपड़े उतार दिए। अब मैं भी पूरी तरह से नंगा था। मेरा लिंग पूरी तरह से खड़ा था और उन्हें देखने के लिए बेकरार था।

अंशिका भाभी ने मेरे लिंग को देखा और उनकी आंखें चौड़ी हो गईं। “विकास… यह तो बहुत बड़ा है…” उन्होंने घबराते हुए कहा।

“डरो मत भाभी, थोड़ी देर में यह आपको बहुत मजा देगा,” मैंने कहते हुए उनके पैरों के बीच आ गया।

मैंने अपने लिंग के सिरे को उनकी योनि के मुहाने पर रखा और धीरे से दबाना शुरू किया। वो दर्द से चीखने लगीं।

“आह… विकास… बहुत दर्द हो रहा है… रुको…” उन्होंने कहा।

“भाभी, पहली बार में थोड़ा दर्द होता है। लेकिन फिर बहुत मजा आएगा,” मैंने कहते हुए एक जोरदार धक्का लगा दिया।

मेरा लिंग आधा अंदर चला गया। वो दर्द से कराह उठीं और अपने नाखून मेरी पीठ में गाड़ दिए।

“आह… विकास… बहुत दर्द हो रहा है… प्लीज रुको…” वो रोने लगीं।

मैंने रुककर उनके होठों पर किस किया और उनके स्तनों को सहलाने लगा। कुछ देर बाद वो शांत हुईं और मैंने फिर से धक्का लगाना शुरू किया।

धीरे-धीरे मेरा पूरा लिंग उनकी योनि में समा गया। वो पूरी तरह से भर चुकी थीं और मुझे कसकर पकड़े हुए थीं।

“कैसा लग रहा है भाभी?” मैंने पूछा।

“बहुत… बहुत अच्छा…” उन्होंने कहते हुए अपने नितंब ऊपर उठाए।

मैंने धक्के लगाना शुरू किया। धीरे-धीरे मेरी गति बढ़ने लगी। वो भी मेरे साथ साथ देने लगीं और अपने नितंब ऊपर-नीचे करने लगीं।

“ओह… विकास… और तेज… और तेज करो…” वो चिल्लाने लगीं।

मैंने पूरी ताकत से धक्के लगाने शुरू किए। हमारे शरीर एक-दूसरे से टकरा रहे थे और आवाजें पूरे कमरे में गूंज रही थीं।

“पच… पच… पच…” की आवाजें गूंज रही थीं।

“आह… हां… विकास… मैं… मैं…” वो कुछ कह नहीं पा रही थीं।

मैं समझ गया कि वो क्लाइमेक्स के करीब हैं। मैंने और तेजी से धक्के लगाने शुरू किए। वो पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थीं और बस आहें भर रही थीं।

“विकास… मैं… मैं झड़ने वाली हूं…” उन्होंने चिल्लाते हुए कहा।

“मैं भी भाभी… एक साथ…” मैंने कहा।

और फिर हम दोनों एक साथ क्लाइमेक्स पर पहुंचे। मैंने अपना वीर्य उनकी योनि में ही छोड़ दिया और वो भी झड़ गईं। हम दोनों थक कर एक-दूसरे पर गिर पड़े।

कुछ देर बाद जब हमारी सांसें सामान्य हुईं तो मैंने उनके होठों पर एक प्यार भरा किस किया।

“भाभी, यह कैसा रहा?” मैंने पूछा।

“बहुत… बहुत अच्छा विकास… मैंने कभी सोचा नहीं था कि यह इतना मजेदार हो सकता है,” उन्होंने कहा।

बारिश में भीगी भाभी की चुदाई का दूसरा दौर

हम दोनों कुछ देर तक एक-दूसरे को गले लगाए पड़े रहे। बाहर बारिश अभी भी तेजी से हो रही थी और बिजली कड़क रही थी। यह माहौल और भी रोमांटिक बना रहा था।

कुछ देर बाद मैंने देखा कि अंशिका भाभी फिर से उत्तेजित होने लगी थीं। उनका हाथ मेरे सीने पर घूम रहा था और वो मेरे कान में कुछ फुसफुसा रही थीं।

“विकास… मुझे और चाहिए…” उन्होंने शर्माते हुए कहा।

मैं समझ गया कि वो अब पूरी तरह से मेरी हो चुकी हैं। मैंने उन्हें फिर से किस किया और इस बार उन्हें उठाकर बेडरूम में ले गया।

बेडरूम में मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया और उनके ऊपर आ गया। इस बार मैं उनके चेहरे के करीब था और उनकी आंखों में देख रहा था।

“भाभी, इस बार मैं आपको और भी ज्यादा मजा दूंगा,” मैंने कहा।

मैंने उनके पैरों को फैलाया और उनकी योनि को चाटना शुरू कर दिया। वो एकदम से उछल पड़ीं।

“विकास… यह क्या कर रहे हो… गंदी जगह है…” उन्होंने कहा।

“भाभी, यह कोई गंदी जगह नहीं है। यह तो बहुत पवित्र जगह है। और इसका स्वाद तो बहुत अच्छा है,” मैंने कहते हुए उनकी योनि में जीभ डाल दी।

“आह… विकास… ओह… यह…” वो बोल नहीं पा रही थीं।

मैंने उनकी योनि को जीभ से चाटना शुरू किया। कभी ऊपर तो कभी नीचे। उनकी क्लिटोरिस को अपने होठों में लेकर चूस रहा था। वो पागल हो रही थीं और अपने नितंब ऊपर-नीचे कर रही थीं।

“विकास… बहुत मजा आ रहा है… और करो… प्लीज…” वो भीख मांग रही थीं।

मैंने उनकी योनि में एक उंगली डाल दी और उसे अंदर-बाहर करने लगा। साथ ही मैं उनकी क्लिटोरिस को भी चाट रहा था। यह डबल सनसेशन उनके लिए बहुत ज्यादा था।

“आह… मैं… मैं झड़ने वाली हूं…” उन्होंने चिल्लाया।

और फिर वो झड़ गईं। उनकी योनि से प्यार का रस बहने लगा और मैंने उसे चाटकर साफ कर दिया।

इसके बाद मैंने उनके मुंह में अपना लिंग दे दिया। वो पहले तो थोड़ी झिझकीं, लेकिन फिर उसे चूसने लगीं।

“ओह भाभी… बहुत अच्छा लग रहा है…” मैंने कहा।

वो मेरे लिंग को अपने मुंह में ले-लेकर चूस रही थीं और मैं सातवें आसमान पर था।

कुछ देर बाद मैंने उनसे कहा, “भाभी, अब मैं आपको पीछे से चोदना चाहता हूं।”

उन्होंने शर्माते हुए कहा, “विकास, यह कैसे होगा?”

“बस आप घुटनों के बल आ जाइए,” मैंने कहा।

उन्होंने वैसा ही किया। अब वो घुटनों के बल थीं और उनका सुडौल नितंब मेरे सामने था। मैंने उनके नितंबों को सहलाया और फिर अपना लिंग उनकी योनि में डाल दिया।

इस पोजीशन में वो और भी ज्यादा टाइट लग रही थीं। मैंने धक्के लगाने शुरू किए और वो आहें भरने लगीं।

“ओह… विकास… यह… यह बहुत गहरा जा रहा है…” उन्होंने कहा।

“भाभी, इसी में तो असली मजा है,” मैंने कहते हुए और तेजी से धक्के लगाने शुरू किए।

हम दोनों पसीने से लथपथ हो चुके थे लेकिन रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। मैंने उनके बालों को पकड़ा और थोड़ा खींचा। वो और भी ज्यादा उत्तेजित हो गईं।

“हां… विकास… और तेज… मुझे अपनी बनालो… पूरी तरह से…” वो चिल्लाने लगीं।

मैंने पूरी ताकत से धक्के लगाए। हमारे शरीर एक-दूसरे से टकरा रहे थे और आवाजें पूरे कमरे में गूंज रही थीं।

“पच… पच… पच…” की आवाजें लगातार सुनाई दे रही थीं।

सावन में भीगी भाभी को चौदा

बाहर बारिश अभी भी तेजी से हो रही थी। बिजली कड़क रही थी और गरजने की आवाजें आ रही थीं। यह माहौल और भी रोमांटिक बना रहा था।

मैंने अंशिका भाभी को घुमाकर फिर से अपने नीचे लिटा दिया। इस बार मैं उनके पैरों के बीच बैठ गया और उनके पैरों को अपने कंधों पर रख लिया।

“भाभी, इस बार मैं आपको और भी गहराई से चोदूंगा,” मैंने कहा।

मैंने अपना लिंग उनकी योनि में डाला और धक्के लगाने शुरू किए। इस पोजीशन में मेरा लिंग पूरी तरह से अंदर जा रहा था और वो पूरी तरह से भर चुकी थीं।

“आह… विकास… यह… यह बहुत गहरा है…” उन्होंने कहा।

मैंने उनके स्तनों को पकड़ा और उन्हें दबाते हुए धक्के लगाने शुरू किए। वो पागल हो रही थीं और अपने सिर को इधर-उधर कर रही थीं।

“विकास… मैं… मैं फिर से झड़ने वाली हूं…” उन्होंने कहा।

“रुको भाभी, मैं भी आ रहा हूं…” मैंने कहा।

हम दोनों एक साथ क्लाइमेक्स पर पहुंचे। मैंने अपना वीर्य उनकी योनि में छोड़ दिया और वो भी झड़ गईं।

इसके बाद हम दोनों थक कर एक-दूसरे के बगल में लेट गए। मैंने उन्हें अपनी बांहों में भर लिया और उनके माथे पर किस किया।

“भाभी, आपको मजा आया?” मैंने पूछा।

“बहुत… बहुत ज्यादा विकास। मैंने कभी सोचा नहीं था कि यह इतना अच्छा हो सकता है,” उन्होंने कहा।

देसी भाभी को बारिश में देखकर आया मुंह में पानी

कुछ देर आराम करने के बाद, मैंने देखा कि बाहर बारिश थोड़ी कम हुई थी लेकिन अभी भी हो रही थी। मैंने अंशिका भाभी से कहा, “भाभी, चलिए बालकनी में चलते हैं। बारिश में भीगने का अलग ही मजा है।”

पहले तो वो मना करने लगीं लेकिन फिर मेरे जोर देने पर मान गईं। हम दोनों तौलिये में लिपटकर बालकनी में आ गए।

बाहर का माहौल बहुत खूबसूरत था। ठंडी हवा चल रही थी और बारिश की फुहारें आ रही थीं। मैंने अंशिका भाभी को अपने पास खींचा और उन्हें किस करने लगा।

“विकास, कोई देख लेगा तो?” उन्होंने चिंता की।

“कोई नहीं देखेगा भाभी, सब सो रहे हैं। और यह मौसम भी हमारे साथ है,” मैंने कहा।

मैंने उनके तौलिये को खोला और वो फिर से नंगी हो गईं। बारिश की फुहारें उनके शरीर पर पड़ रही थीं और वो और भी ज्यादा सेक्सी लग रही थीं।

“वाह भाभी, आप तो बारिश में और भी खूबसूरत लग रही हैं,” मैंने कहा।

मैंने उन्हें बालकनी में ही दीवार से सटा दिया और उनके पैर उठाकर अपने कमर पर रख लिए। फिर मैंने अपना लिंग उनकी योनि में डाल दिया।

“आह… विकास… यह… यह बहुत अच्छा है…” उन्होंने कहा।

बारिश की फुहारें हम दोनों पर पड़ रही थीं और हम दोनों एक-दूसरे में खोए हुए थे। यह नजारा बहुत ही रोमांटिक था।

“पच… पच… पच…” की आवाजें बारिश की आवाज के साथ मिलकर एक अलग ही संगीत बना रही थीं।

मैंने उन्हें पूरी ताकत से चोदना शुरू किया। वो मेरे कंधों को पकड़े हुए थीं और आहें भर रही थीं।

“विकास… और तेज… मुझे पूरी तरह से अपना बनालो…” वो चिल्लाने लगीं।

मैंने और तेजी से धक्के लगाए। हम दोनों पूरी तरह से भीग चुके थे लेकिन रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।

कुछ देर बाद मैंने उनको घुमाया और अब वो बालकनी की रेलिंग को पकड़े हुए थीं। मैंने उनके पीछे से उन्हें चोदना शुरू किया।

“आह… विकास… यह… यह बहुत गहरा जा रहा है…” उन्होंने कहा।

मैंने उनके स्तनों को पीछे से ही पकड़ा और दबाते हुए धक्के लगाने लगा। वो पागल हो रही थीं और अपने नितंब ऊपर-नीचे कर रही थीं।

गर्मागर्म देसी भाभी की चुदाई

बालकनी में यह सब करने के बाद हम दोनों वापस अंदर आ गए। हम दोनों पूरी तरह से भीग चुके थे और ठंड लग रही थी।

मैंने तौलिये से उनका शरीर पोंछा और उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया। फिर मैंने उनके ऊपर आकर उन्हें गर्म करने की कोशिश की।

“भाभी, ठंड लग रही है?” मैंने पूछा।

“हां… थोड़ी…” उन्होंने कहा।

मैंने उन्हें कसकर गले लगाया और उनके शरीर को अपने शरीर से सहलाने लगा। धीरे-धीरे हम दोनों फिर से उत्तेजित होने लगे।

मैंने उनके होठों पर किस किया और धीरे-धीरे नीचे की तरफ बढ़ने लगा। उनके गर्दन पर किस किया, फिर उनके स्तनों पर, फिर उनके पेट पर और फिर उनकी योनि पर।

“विकास… फिर से…” उन्होंने कहा।

मैंने उनकी योनि को चाटना शुरू कर दिया। वो फिर से गर्म होने लगीं और अपने नितंब ऊपर उठाने लगीं।

मैंने उनकी योनि में दो उंगलियां डाल दीं और उन्हें अंदर-बाहर करने लगा। साथ ही मैं उनकी क्लिटोरिस को भी चाट रहा था।

“आह… विकास… बहुत मजा आ रहा है…” वो बड़बड़ाने लगीं।

कुछ देर बाद मैंने उनके ऊपर आ गया और अपना लिंग उनकी योनि में डाल दिया। इस बार वो पूरी तरह से तैयार थीं और मेरा लिंग आसानी से अंदर चला गया।

मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। वो भी मेरे साथ साथ दे रही थीं और अपने नितंब ऊपर-नीचे कर रही थीं।

“विकास… मुझे… मुझे और चाहिए…” वो कह रही थीं।

मैंने उनके पैरों को अपने कंधों पर रखा और और गहराई से धक्के लगाने लगा। वो चीखने लगीं।

“आह… हां… विकास… मैं… मैं…” वो कुछ कह नहीं पा रही थीं।

मैं समझ गया कि वो फिर से झड़ने वाली हैं। मैंने और तेजी से धक्के लगाए और फिर हम दोनों एक साथ झड़ गए।

सावन की चुदाई का मजा

अब रात काफी हो चुकी थी लेकिन हम दोनों का मन नहीं भरा था। हम दोनों एक-दूसरे को गले लगाए पड़े थे और बातें कर रहे थे।

“विकास, तुमने मुझे आज जो मजा दिया है वह मैं कभी नहीं भूलूंगी,” अंशिका भाभी ने कहा।

“भाभी, यह तो सिर्फ शुरुआत है। आगे-आगे और भी मजा आएगा,” मैंने कहा।

वो मुस्कुराईं और मेरे सीने पर किस किया। फिर वो नीचे की तरफ बढ़ीं और मेरे लिंग को अपने हाथ में ले लिया।

“यह तो फिर से खड़ा हो गया,” उन्होंने कहा।

“भाभी, आपके सामने यह कैसे शांत रह सकता है,” मैंने कहा।

वो मुस्कुराईं और मेरे लिंग को अपने मुंह में ले लिया। वो उसे चूसने लगीं और मैं सातवें आसमान पर पहुंच गया।

“ओह भाभी… बहुत अच्छा लग रहा है…” मैंने कहा।

वो मेरे लिंग को जीभ से चाट रही थीं और फिर उसे मुंह में ले-लेकर चूस रही थीं। मैं उनके बालों को सहला रहा था और मजा ले रहा था।

कुछ देर बाद मैंने उनसे कहा, “भाभी, अब मैं आपको एक अलग अंदाज में चोदना चाहता हूं।”

“कैसे?” उन्होंने पूछा।

“आप मेरे ऊपर आ जाइए,” मैंने कहा।

मैंने अपनी पीठ के बल लेट गया और उन्हें अपने ऊपर बैठने का इशारा किया। वो थोड़ी झिझकीं लेकिन फिर मान गईं।

वो मेरे ऊपर बैठ गईं और मैंने अपना लिंग उनकी योनि में डाल दिया। अब वो खुद ही ऊपर-नीचे होने लगीं।

“आह… यह… यह बहुत अच्छा है…” उन्होंने कहा।

मैंने उनके स्तनों को पकड़ा और उन्हें दबाते हुए उनकी कमर को सहलाने लगा। वो पूरी तरह से मस्त हो चुकी थीं और जोर-जोर से आहें भर रही थीं।

“विकास… मैं… मैं झड़ने वाली हूं…” उन्होंने कहा।

“रुको भाभी, मैं भी…” मैंने कहा।

हम दोनों एक साथ झड़ गए। वो मेरे ऊपर ही गिर पड़ीं और हम दोनों एक-दूसरे को गले लगाए पड़े रहे।

रात भर की होली

रात बीत चुकी थी लेकिन हम दोनों का मन नहीं भरा था। हम दोनों ने फैसला किया कि पूरी रात हम एक-दूसरे का आनंद लेंगे।

मैंने उन्हें फिर से नीचे लिटाया और उनके पैरों को फैलाया। इस बार मैंने उनकी योनि में अपनी तीन उंगलियां डाल दीं।

“आह… विकास… यह… यह बहुत ज्यादा है…” उन्होंने कहा।

“भाभी, आप पूरी तरह से मेरी हो चुकी हैं। अब मैं आपको पूरी तरह से खोलूंगा,” मैंने कहा।

मैंने अपनी उंगलियों से उनकी योनि को चोदना शुरू किया। वो पागल हो रही थीं और अपने नितंब ऊपर-नीचे कर रही थीं।

“ओह… हां… विकास… और तेज…” वो चिल्लाने लगीं।

मैंने और तेजी से अपनी उंगलियों को अंदर-बाहर किया। उनकी योनि से प्यार का रस बह रहा था और वो पूरी तरह से गीली हो चुकी थीं।

कुछ देर बाद मैंने अपना लिंग उनकी योनि में डाला और धक्के लगाने शुरू किए। इस बार मैंने उनके पैरों को बहुत ऊंचा उठाया था और पूरी तरह से अंदर जा रहा था।

“आह… विकास… मैं… मैं…” वो चीखने लगीं।

मैंने पूरी ताकत से धक्के लगाए। हमारे शरीर एक-दूसरे से टकरा रहे थे और आवाजें पूरे कमरे में गूंज रही थीं।

“पच… पच… पच…” की आवाजें लगातार सुनाई दे रही थीं।

“विकास… मैं झड़ गई…” उन्होंने कहा।

लेकिन मैं नहीं रुका। मैंने धक्के लगाना जारी रखा। वो फिर से उत्तेजित होने लगीं और मेरे साथ साथ देने लगीं।

“और… और तेज विकास… मुझे और दो…” वो चिल्लाने लगीं।

मैंने और तेजी से धक्के लगाए। अब मैं भी क्लाइमेक्स के करीब था।

“भाभी… मैं… मैं आ रहा हूं…” मैंने कहा।

“हां… अंदर ही छोड़ दो… प्लीज…” उन्होंने कहा।

मैंने अपना वीर्य उनकी योनि में ही छोड़ दिया और वो भी फिर से झड़ गईं।

सुबह हो चुकी थी। बारिश अब रुक चुकी थी लेकिन मौसम अभी भी ठंडा था। मैं और अंशिका भाभी एक-दूसरे की बांहों में सो रहे थे।

जब मेरी आंख खुली तो मैंने देखा कि अंशिका भाभी मुझे देख रही थीं और मुस्कुरा रही थीं।

“गुड मॉर्निंग विकास,” उन्होंने कहा।

“गुड मॉर्निंग भाभी,” मैंने कहते हुए उनके होठों पर किस किया।

“कल रात बहुत मजा आया,” उन्होंने कहा।

“हां भाभी, यह रात मैं कभी नहीं भूलूंगा,” मैंने कहा।

हम दोनों फिर से एक-दूसरे में खो गए। मैंने उन्हें किस किया और उनके स्तनों को सहलाने लगा।

“विकास, अब हमें उठना चाहिए। तुम्हारे भैया कभी भी आ सकते हैं,” उन्होंने कहा।

“हां भाभी, लेकिन उससे पहले एक बार और…” मैंने कहते हुए उनके ऊपर आ गया।

उन्होंने मुस्कुराते हुए अपने पैर फैला दिए। मैंने अपना लिंग उनकी योनि में डाला और धीरे-धीरे धक्के लगाने लगा।

“आह… विकास… सुबह-सुबह…” उन्होंने कहा।

“भाभी, यह तो सुबह का सबसे अच्छा व्यायाम है,” मैंने कहा।

मैंने धक्के लगाना जारी रखा। वो भी मेरे साथ साथ दे रही थीं और आहें भर रही थीं।

“ओह… विकास… मैं… मैं फिर से…” उन्होंने कहा।

हम दोनों एक साथ क्लाइमेक्स पर पहुंचे। मैंने अपना वीर्य उनकी योनि में छोड़ दिया और फिर उनके ऊपर ही गिर पड़ा।

हम दोनों अभी एक-दूसरे को गले लगाए पड़े थे कि तभी दरवाजे पर तेज दस्तक हुई।

अंशिका भाभी एकदम से होश में आईं और घबरा गईं। “विकास… यह कौन हो सकता है?” उन्होंने कहा।

मैंने तुरंत स्थिति को संभालते हुए कहा, “आप चिंता मत कीजिए, मैं देखता हूं।”

मैंने जल्दी से अपने कपड़े पहने और दरवाजे की तरफ गया। खोलने पर सामने मेरे भैया खड़े थे, जो अंशिका भाभी को ढूंढते हुए आए थे।

“अरे भैया, आप इतनी सुबह?” मैंने घबराते हुए कहा।

“विकास, तुम्हारी भाभी कल रात से घर नहीं लौटीं। उनका फोन भी बंद जा रहा है। कहीं वो यहां तो नहीं रुक गईं?” भैया ने चिंता से पूछा।

मैंने सोचा कि अब क्या करूं। लेकिन फिर मैंने कहा, “हां भैया, भाभी कल रात यहीं रुक गई थीं। बारिश बहुत तेज हो गई थी इसलिए मैंने उन्हें रुकने के लिए कह दिया था।”

भैया ने राहत की सांस ली। “ठीक है, मैं उन्हें लेने आया हूं।”

तभी अंशिका भाभी बाहर आईं। वो अब साड़ी में तैयार हो चुकी थीं और बिल्कुल सामान्य दिख रही थीं।

“अरे, आप आ गए?” उन्होंने भैया से कहा।

“हां, तुम्हारी चिंता हो रही थी। चलो घर चलते हैं,” भैया ने कहा।

अंशिका भाभी ने मेरी तरफ देखा—उनके दिमाग में अभी भी वह उलझन और मेरा जादू छाया हुआ था। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि यह सब मौसम और चाय का असर था या मेरी चालाक चाल, लेकिन उस शाम के बाद दोनों के बीच एक ऐसा राज बन गया जो कभी खत्म नहीं होने वाला था।

भैया और भाभी के जाने के बाद मैं अकेला रह गया। मैंने बालकनी में खड़े होकर बाहर का नजारा देखा। बारिश अब रुक चुकी थी लेकिन मौसम अभी भी ठंडा था।

मुझे कल रात की यादें आ रही थीं। अंशिका भाभी का वो गीला बदन, उनकी वो आहें, उनकी वो मादक अदाएं—सब कुछ मेरे दिमाग में घूम रहा था।

मुझे पता था कि यह सिर्फ एक रात की बात नहीं थी। अब हम दोनों के बीच एक ऐसा रिश्ता बन चुका था जो शायद हमेशा के लिए रहेगा।

कुछ देर बाद मेरे फोन पर एक मैसेज आया। यह अंशिका भाभी का था: “विकास, कल रात बहुत यादगार थी। शायद हम फिर से मिल सकते हैं?”

मैंने मुस्कुराते हुए रिप्लाई किया: “जब भी आप कहें भाभी, मैं हमेशा तैयार हूं।”

और इस तरह से सावन की इस बारिश ने हम दोनों के बीच एक ऐसा रिश्ता बना दिया जो शायद कभी खत्म नहीं होगा। बारिश में भीगी भाभी की चुदाई की यादें मेरे दिमाग में हमेशा के लिए बस गईं।

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