मैं बैंगलोर गया था इंटरव्यू के लिए। तीन दिन का ट्रिप था। पहला दिन इंटरव्यू में चला गया, दूसरे दिन सुबह मुझे मैसेज आया कि एक रिश्तेदार यहां रहती है – अंजलि भाभी। मैंने सोचा मिल लेता हूं, वैसे भी समय था। अंजलि भाभी ने दिखाई जन्नत
अंजलि भाभी ने मुझे अपने फ्लैट पर बुलाया। इलेक्ट्रॉनिक सिटी के पास एक हाई-राइज अपार्टमेंट था। जब मैं पहुंचा तो दरवाजा खोला तो मेरी सांसें थम सी गईं। अंजलि भाभी… वो कोई साधारण औरत नहीं थी। उम्र करीब 32-33 साल की होगी, लेकिन जिस्म ऐसा जैसे किसी ने गजब की मिट्टी से तराशा हो। गोरा बदन, लंबे काले बाल जो कंधे पर लहरा रहे थे, और वो साड़ी… पीले रंग की साड़ी जो उनके गोल-मटोल हिप्स पर कसी हुई थी। ब्लाउस की कटिंग ऐसी कि आधे चुचे बाहर झांक रहे थे, गोरा गोरा मांस जो हर सांस के साथ उठ-उठ कर मुझे बुला रहा था।
“आओ ना, क्यों खड़े हो दरवाजे पर?” उसकी आवाज में एक अजीब सी खनक थी, ऐसी जैसे शहद में किसी ने शराब मिला दी हो।
मैं अंदर गया। फ्लैट बड़ा था, लेकिन मेरी नजरें सिर्फ अंजलि पर टिकी थीं। वो मेरे सामने सोफे पर बैठी, पैर क्रॉस करके, साड़ी का पल्लू इतना पीछे सरका हुआ कि उसका पेट दिख रहा था, नाभि एक गहरा गड्ढा जिसमें मैं गिरना चाहता था।
“इंटरव्यू कैसा रहा?” उसने पूछा, लेकिन उसकी आंखों में कोई दिलचस्पी नहीं थी इंटरव्यू में। वो मुझे देख रही थी, ऐसे जैसे कोई शिकारी अपने शिकार को देखता है।
“अच्छा था भाभी,” मैंने कहा, आवाज में हल्की सी खिचड़ी थी।
वो मुस्कुराई, होंठों पर लाली चमकी और वो उठी। साड़ी का घेरा संभालते हुए वो मेरे पास आई, इतने करीब कि उसके चुचों की गर्मी मुझे महसूस होने लगी। “तुम्हें पता है, मैंने तुम्हें पहले भी देखा है… तुम्हारी फोटो में। तुम्हारे भैया ने दिखाई थी। मुझे तब से इंतजार था कि कब तुम आओगे।”
मेरा दिल धड़कने लगा। ये क्या हो रहा था? ये एक रिश्तेदार थी, लेकिन उसकी बातों में कोई शर्म नहीं थी, कोई लाज नहीं थी। वो सीधे मेरे कान में बोली, “मैं जानती हूं तुम मुझे देख क्या रहे हो… वो चुचे जो बाहर झांक रहे हैं? वो तुम्हें चाहिए ना?”
मैं चौंक गया, पीछे हटने की कोशिश की लेकिन वो मेरे ठीक सामने खड़ी थी। उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपने चुचे पर रख दिया। कपड़े के ऊपर से वो गोलाई, वो नरमी, वो गर्मी… मैं पागल होने लगा।
“भाभी… ये ठीक नहीं…” मैंने कहा लेकिन मेरे हाथ ने अपना फैसला सुनाया। मैंने उसके चुचे को दबाना शुरू कर दिया, कपड़े के ऊपर से ही उसकी उभरी हुई निप्पल को मसलने लगा।
“ओह… हां… ऐसे ही…” अंजलि ने सिर पीछे फेंका, बाल बिखरे और वो मेरे ऊपर लटक गई। उसने मेरे होठों पर अपने होठ रखे, एक किस जो कोई बहन-भाई का नहीं, बल्कि दो जानवरों का था। उसकी जीभ मेरे मुंह में घुसी, मेरी जीभ को चूसने लगी, मेरे थूक को खींचने लगी।
“तुम्हारे मुंह का स्वाद अच्छा है,” वो मुझसे अलग होकर बोली, सांसें फूंक रही थी। “चलो, मैं तुम्हें जन्नत दिखाती हूं… असली जन्नत।”
वो मुझे अपने बेडरूम में ले गई। वहां का नजारा देखकर मैं हैरान रह गया। एक बड़ा सा बेड, गुलाबी रोशनी, और दीवारों पर अश्लील तस्वीरें… पुरुषों के लंड और औरतों की चूत के क्लोज-अप शॉट्स।
“ये मेरा खास कमरा है,” अंजलि ने कहा और अपनी साड़ी खोलने लगी। वो एक-एक करके कपड़े उतारती गई, और मैं उसे देखता रहा। जब वो सिर्फ ब्रा और पैंटी में रह गई, तो मैंने देखा कि उसका बदन कोई मामूली औरत का नहीं था। गोल-गोल चुचे जो ब्रा से भी बाहर निकलने को बेचैन थे, चौड़े कूल्हे, और वो पेटीकोट जो उसकी चूत की झलक दे रहा था।
“अब तुम्हारी बारी,” उसने आदेश दिया।
मैंने अपने कपड़े उतारे। जब मेरा लंड बाहर आया, तो वो आंखें फाड़कर देखने लगी। 8 इंच का मोटा काला लंड जो पूरी तरह खड़ा था, नसें फूली हुई, सुपारा लाल और फूला हुआ।
“वाह… ये तो बहुत बड़ा है,” अंजलि फुसफुसाई और घुटनों पर बैठ गई। उसने मेरे लंड को हाथ में लिया, उसकी गर्मी को महसूस किया, फिर धीरे से अपने मुंह में ले लिया।
उसके मुंह की गर्मी ने मुझे पागल कर दिया। वो लंड को चूसने लगी, पहले धीरे-धीरे, फिर तेजी से। उसकी जीभ लंड के नीचे की नस पर चल रही थी, मेरे सुपारे को चाट रही थी। वो पूरा लंड अपने गले तक उतार रही थी, और मैं उसके मुंह को चोदने लगा।
“उम्म्म… अह्ह्ह… चूसो… और जोर से…” मैं कराह रहा था।
अंजलि ने मेरे लंड से थूक लगाकर हाथ में लिया और हिलाने लगी। उसके हाथों की स्पीड देखकर मैं समझ गया कि ये औरत कोई शरिफ घर की नहीं, बल्कि एक रंडी है जो हर तरह का मजा लेती है।
“अब मेरी चूत चाटो,” वो उठी और बेड पर लेट गई, पैर फैलाए।
मैंने उसकी पैंटी खींची। जो नजारा सामने आया, उसे देखकर मेरा दिमाग घूम गया। एक गुलाबी, गीली चूत, बिल्कुल साफ शेव की हुई, जिससे पानी टपक रहा था। उसकी चूत की दरार इतनी गहरी थी कि मैं अपनी जीभ उसमें डाल सकता था।
मैं उसकी चूत पर झुका। पहले तो उसकी जांघों पर किस किए, फिर धीरे से चूत के ऊपर होंठ रख दिए। वो चीख उठी, “आह्ह्ह… हां… चाटो… चाटो मेरी चूत को…”
मैंने जीभ से उसकी चूत की दरार चाटनी शुरू की, ऊपर से नीचे तक। उसकी चूत का स्वाद नमकीन था, गर्म था, और बहुत गीला। मैंने अपनी जीभ उसके छेद में डाली, अंदर-बाहर करने लगा। अंजलि पागल होकर चीख रही थी, अपने चुचे खुद ही मसल रही थी।
“ओह… फक… हां… और अंदर… अपनी जीभ अंदर डालो…” वो चिल्ला रही थी।
मैंने उसकी क्लिटोरिस को मुंह में ले लिया और चूसने लगा। वो एकदम तन गई, उसका बदन कांपने लगा, और एक झटके में उसने पानी छोड़ दिया… मेरे मुंह पर ही। उसका पानी बहुत गाढ़ा था, गर्म, और मैंने सब पी लिया।
“अब चोदो मुझे… अपने इस बड़े लंड से मेरी चूत फाड़ दो,” अंजलि ने कहा, आंखों में पागलपन था।
मैं उसके ऊपर आया, लंड को उसकी चूत के मुहाने पर रखा। वो इतनी गीली थी कि बिना किसी जोर के आधा लंड अंदर चला गया।
“आह्ह्ह… बड़ा है… बहुत बड़ा है…” अंजलि कराही।
मैंने एक जोर का धक्का मारा और पूरा लंड अंदर घुसा दिया। उसकी चूत इतनी टाइट थी कि मुझे लगा कि मेरा लंड कट जाएगा, लेकिन वो इतनी गीली थी कि लंड आराम से अंदर-बाहर हो रहा था।
मैंने उसे चोदना शुरू किया। पहले धीरे-धीरे, फिर तेजी से। हर धक्के पर बेड कूदता था, अंजलि की चीखें गूंजती थीं। मैं उसके चुचों को पकड़कर दबा रहा था, उसकी निप्पलों को मसल रहा था।
“हां… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… मुझे रंडी बना दो…” अंजलि बकवास कर रही थी।
मैंने उसके पैर अपने कंधों पर रखे और और गहरा चोदने लगा। मेरा लंड उसकी चूत के सबसे अंदर तक जा रहा था, उसके गर्भाशय को छू रहा था। वो बेहोश होने की हालत में थी, आंखें घूम रही थीं, मुंह से झाग निकल रहा था।
“मैं झड़ने वाली हूं… और जोर से… हां… हां…” अंजलि चिल्लाई और एक बार फिर उसने पानी छोड़ दिया। इस बार उसका पानी इतना ज्यादा था कि बेड गीला हो गया।
मैंने उसे घोड़ी बनाया। वो अपने हाथों और घुटनों पर थी, मैं पीछे से उसकी चूत में लंड डालकर चोद रहा था। उसके कूल्हे इतने बड़े थे कि हर धक्के पर वो लहराते थे, थप-थप की आवाज होती थी। मैंने उसके बाल पकड़े और पीछे की ओर खींचे, उसकी गर्दन मोड़ दी।
“कैसी लग रही है मेरी चूत?” अंजलि ने पूछा, मुड़कर मुझे देखते हुए।
“बहुत टाइट है… बहुत मस्त है…” मैंने कहा और धक्के और तेज कर दिए।
मैंने उसे उल्टा लिटाया, सिर बेड के किनारे से बाहर लटकाया। फिर मैं उसके मुंह में लंड डालने लगा। वो गले तक ले रही थी, उसकी आंखें बाहर निकल रही थीं, लेकिन वो रुक नहीं रही थी। मैंने उसके मुंह को चूत की तरह चोदा, उसके थूक से लंड गीला हो गया।
“अब तुम्हारी गांड मारता हूं,” मैंने कहा।
“हां… मारो… मेरी गांड फाड़ दो…” अंजलि ने कहा।
मैंने उसकी गांड पर थूक लगाया, उसे अच्छी तरह चिकना किया। फिर लंड का सुपारा उसके गांड के छेद पर रखा और एक जोर का धक्का मारा। आधा लंड अंदर चला गया।
“आह्ह्ह… दर्द… बहुत दर्द…” अंजलि चीखी।
“सहन करो रंडी…” मैंने कहा और पूरा लंड अंदर घुसा दिया।
उसकी गांड इतनी टाइट थी कि मुझे लगा कि मैं झड़ जाऊंगा। मैंने धीरे-धीरे चोदना शुरू किया, फिर स्पीड बढ़ाई। अंजलि की चीखें कमरे में गूंज रही थीं, वो अपने चुचे खुद मसल रही थी।
“हां… और जोर से… मेरी गांड फाड़ दो… मुझे अपनी रखैल बना लो…” वो चिल्ला रही थी।
मैंने उसे घंटों चोदा। चूत में, गांड में, मुंह में। हर छेद का इस्तेमाल किया। वो बार-बार झड़ रही थी, उसका पानी बेड पर फैल गया था।
आखिर में, जब मैं झड़ने वाला था, तो मैंने उसे खींचा और उसके मुंह पर खड़ा हो गया। मैंने अपना लंड हिलाया और गाढ़ा, गर्म माल उसके चेहरे पर निकाल दिया। वो माल उसके चेहरे पर, बालों पर, चुचों पर फैल गया।
लेकिन यहीं खत्म नहीं हुआ। अंजलि ने मुझे एक ऐसी बात बताई जो सुनकर मैं चौंक गया। उसने कहा कि वो मेरे भैया से खुश नहीं थी, कि वो हमेशा से मुझे चाहती थी, कि उसने ये सब प्लान किया था।
“अब मैं तुम्हारी हो गई,” उसने कहा, मेरा माल अपने चेहरे पर लगाते हुए। “अब जब भी तुम आओगे, मैं तुम्हारी रंडी बनकर रहूंगी।”
उस रात हमने तीन बार और सेक्स किया। हर बार नई पोजीशन, नई जगह। बाथरूम में, किचन में, बालकनी में। हर जगह उसकी चूत, उसकी गांड, उसके चुचे।
जब मैं सुबह निकला, तो अंजलि ने मुझे एक फोटो दिखाई – हमारे सेक्स की, जो उसने छुपकर ली थी। “याद रखने के लिए,” वो बोली, “और अगली बार जब आओ, तो और ज्यादा मजा करेंगे।”
मैं बैंगलोर से वापस आया, लेकिन मेरी यादों में अंजलि की वो गीली चूत, वो गोल चुचे, और वो पागलपन भरी चुदाई हमेशा के लिए बस गई। वो जन्नत थी जो उसने मुझे दिखाई, एक ऐसी जन्नत जिससे वापसी का कोई रास्ता नहीं था।
तीन महीने बाद मुझे फिर से बुलावा आया। इस बार उसने कहा कि वो अकेली नहीं है, उसकी एक सहेली भी है जो मुझे देखना चाहती है। लेकिन ये कहानी अब शुरू हो रही थी, एक नई जन्नत की ओर जो और भी गहरी, और भी गंदी, और भी पागल थी। अंजलि ने मुझे सिखाया था कि इंसान का असली मजा सिर्फ एक जगह नहीं, हर जगह मिलता है – चूत में, गांड में, मुंह में, और उस दिमाग में जो ये सब प्लान करता है।
मैंने उससे वादा किया था कि मैं वापस आऊंगा, और जब आऊंगा तो उसे ऐसे चोदूंगा कि वो भूल जाएगी कि उसका पति कौन है। वो मुस्कुराई थी, उसके होठों पर वो ही शराबी मुस्कान थी, और उसने कहा था, “मैं इंतजार करूंगी… अपनी चूत तुम्हारे लिए गीली रखूंगी… हमेशा।”
और मैं जानता था कि ये सिर्फ शुरुआत थी। बैंगलोर की वो रात, वो अपार्टमेंट, वो गुलाबी रोशनी, और अंजलि की वो बेबाक चूत – ये सब मुझे बार-बार खींचेगा, बार-बार उस जन्नत में ले जाएगा जहां कोई रोक-टोक नहीं, कोई शर्म नहीं, सिर्फ दो बदन, दो चूत, दो लंड, और एक अंतहीन चुदाई जो कभी खत्म नहीं होती, बस रुकती है अगली बार के लिए, जब अंजलि फिर से कहेगी, “आओ, मैं तुम्हें जन्नत दिखाती हूं।”
और मैं जाऊंगा, हर बार जाऊंगा, क्योंकि वो जन्नत एक बार देखने के बाद भूलाई नहीं जाती। वो तुम्हारे खून में उतर जाती है, तुम्हारे लंड में, तुम्हारी हर सांस में। अंजलि भाभी ने मुझे सिखाया कि असली जन्नत किसी जन्नत में नहीं, किसी औरत की चूत में होती है, खासकर जब वो औरत तुम्हारी भाभी हो और तुम्हें चोदने के लिए बेताब हो।
मैं अब भी उसी रात को याद करता हूं, जब उसने पहली बार मेरा लंड अपने मुंह में लिया था, जब उसकी जीभ ने मेरे सुपारे को चाटा था, जब उसकी गांड ने मेरे लंड को कसकर पकड़ा था। वो पल, वो आवाजें, वो चीखें, वो थप-थप की आवाज जो दो शरीरों के टकराने से होती है – ये सब मेरे दिमाग में बसा है, और ये कभी नहीं जाएगा।
अंजलि ने मुझे एक मैसेज भेजा था कुछ दिन पहले, एक फोटो – उसकी चूत की, गीली, खुली, उंगली से छेद दिखाते हुए। कैप्शन था, “तुम्हारे इंतजार में।” मैंने उसे देखते ही लंड हिला लिया, और झड़ गया उसी फोटो पर। वो जानती है कि वो मुझे कैसे पागल करती है, कैसे खींचती है, कैसे उस जन्नत की याद दिलाती है जो एक बार मिली थी और अब बार-बार मांगती है।
मैं फिर से बैंगलोर जाने वाला हूं, इस बार कोई इंटरव्यू नहीं, सिर्फ अंजलि, सिर्फ उसकी चूत, सिर्फ उसके चुचे, सिर्फ वो पागलपन जो हम दोनों में भरा है। वो मुझे मैसेज में लिखती है कि इस बार वो कुछ खास तैयारी कर रही है, कुछ ऐसा जो पहले कभी नहीं हुआ। मैं सोचता हूं कि क्या होगा – क्या वो कोई और लड़की लाएगी, क्या वो कोई नया खिलौना इस्तेमाल करेगी, या फिर वो मुझे किसी और जगह ले जाएगी जो और भी ज्यादा जन्नत जैसी हो।
लेकिन एक बात तय है – जो भी होगा, वो अंजलि के साथ होगा, उसकी चूत में होगा, उसकी गांड में होगा, उसके मुंह में होगा। वो मेरी भाभी है, वो मेरी रंडी है, वो मेरी जन्नत है। और मैं उसका देवर, उसका मालिक, उसका वो आशिक जो सिर्फ उसकी चूत के लिए जीता है।
ये कहानी खत्म नहीं होती, ये चलती रहती है, हर रात, हर मैसेज, हर फोटो में। अंजलि ने मुझे जो जन्नत दिखाई थी, वो असली जन्नत थी – एक ऐसी जगह जहां कोई रोक-टोक नहीं, कोई हद नहीं, सिर्फ दो जिस्म जो एक-दूसरे को खा जाते हैं, चूस जाते हैं, चोद जाते हैं, और फिर भी भूखे रहते हैं।
और मैं भूखा हूं, हमेशा भूखा, अंजलि की चूत के लिए, उसके चुचों के लिए, उसकी गीली, गर्म, टाइट चूत के लिए जो मुझे बुला रही है, हमेशा बुला रही है, “आओ, मैं तुम्हें जन्नत दिखाती हूं… फिर से… और फिर से… और फिर से…”
मैं जाऊंगा, क्योंकि मैं उस जन्नत को ठुकरा नहीं सकता। कोई भी नहीं ठुकरा सकता। अंजलि भाभी की चूत एक बार चखने के बाद, उसकी गांड एक बार मारने के बाद, उसके चुचे एक बार चूसने के बाद, तुम वापस नहीं जा सकते। तुम फंस जाते हो, उसी जन्नत में, उसी चूत में, उसी गीली, गर्म, पागल चुदाई में जो कभी खत्म नहीं होती, बस थोड़ी देर के लिए रुकती है, अगले धक्के के लिए, अगले झड़ने के लिए, अगली बार के लिए जब तुम फिर से बैंगलोर जाओगे, और वो तुम्हें फिर से कहेगी, “आओ, मैं तुम्हें जन्नत दिखाती हूं।”
और तुम जाओगे, हर बार जाओगे, क्योंकि वो जन्नत तुम्हारी है, वो चूत तुम्हारी है, वो रंडी तुम्हारी है, और तुम… तुम उसके हो, हमेशा के लिए, उसकी चूत के गुलाम, उसके चुचों के दीवाने, उसकी गांड के आशिक। ये जन्नत है, असली जन्नत, और अंजलि भाभी इसकी देवी, इसकी रानी, इसकी वो रंडी जो तुम्हें हर बार नया मजा देती है, हर बार नई चूत, हर बार नई गांड, हर बार वो ही पागलपन जो तुम्हें पागल कर देता है, बार-बार, बार-बार, बार-बार…
मैंने उससे पूछा था एक बार, “क्यों मुझे? इतने लोग हैं, क्यों मैं?” वो मुस्कुराई थी, उसके होठों पर वो ही शराबी मुस्कान, और बोली थी, “क्योंकि तुम में वो बात है जो औरों में नहीं। तुम्हारा लंड, तुम्हारी हिम्मत, तुम्हारी वो नजर जो मुझे देखते ही मेरी चूत गीली कर देती है। मैंने तुम्हें चुना है, और जो मैं चुनती हूं, वो मेरा होता है, हमेशा के लिए, मेरी चूत में, मेरी गांड में, मेरी हर सांस में।”
मैं उसका हूं, हमेशा के लिए। और वो मेरी, हमेशा के लिए। ये रिश्ता नहीं, ये जुनून है, ये पागलपन है, ये वो जन्नत है जो कभी खत्म नहीं होती, बस चलती रहती है, धक्के दर धक्का, चुदाई दर चुदाई, झड़ना दर झड़ना, और फिर शुरू, बार-बार, हमेशा के लिए, अंजलि और मैं, दो जिस्म, एक चूत, एक लंड, और एक अंतहीन कहानी जो कभी खत्म नहीं होगी, क्योंकि ये जन्नत है, और जन्नत कभी खत्म नहीं होती, बस बदलती है, रूप बदलती है, लेकिन रहती है, हमेशा, मेरे अंदर, अंजलि के अंदर, हम दोनों के बीच, उस गीली, गर्म, पागल चूत में जो मुझे बुला रही है, अभी, इसी पल, “आओ, मैं तुम्हें जन्नत दिखाती हूं…”
और मैं जा रहा हूं, दौड़ रहा हूं, उसकी ओर, उसकी चूत की ओर, उसकी गांड की ओर, उसके चुचों की ओर, उस जन्नत की ओर जो मेरी है, सिर्फ मेरी, हमेशा के लिए मेरी, अंजलि की चूत, अंजलि की गांड, अंजलि के चुचे, अंजलि की वो पागल चुदाई जो मुझे पागल कर देती है, बार-बार, हर रात, हर दिन, हर पल…
ये कहानी यहीं खत्म नहीं होती, ये तो बस शुरुआत थी, असली मजा तो अभी बाकी है, अगली बार, अगली चुदाई, अगली जन्नत… अंजलि इंतजार कर रही है, उसकी चूत गीली है, उसके चुचे तने हुए हैं, उसकी गांड मेरे लंड को याद कर रही है… और मैं, मैं तो बस एक ट्रेन पकड़ने वाला हूं, बैंगलोर की ओर, अंजलि की ओर, उस जन्नत की ओर जो मुझे बुला रही है, हमेशा बुला रही है, “आओ, मैं तुम्हें जन्नत दिखाती हूं… आओ… आओ… आओ…”
मैं आ रहा हूं अंजलि, अपनी चूत तैयार रखना, अपनी गांड तैयार रखना, अपने चुचे तैयार रखना, क्योंकि इस बार मैं पूरे तीन दिन रहूंगा, और तीन दिन लगातार चोदूंगा, तुम्हें, तुम्हारी चूत को, तुम्हारी गांड को, तुम्हारे हर छेद को, हर कोने को, हर जगह को जहां मेरा लंड जा सकता है, जहां तुम मेरा माल ले सकती हो, जहां हम दोनों एक हो सकते हैं, बिना किसी रोक-टोक के, बिना किसी शर्म के, सिर्फ चुदाई, सिर्फ मजा, सिर्फ वो जन्नत जो तुमने मुझे दिखाई थी, और जो मैं हर बार देखना चाहता हूं, बार-बार, हमेशा, तुम्हारे साथ, तुम्हारी चूत में, तुम्हारी गांड में, तुम्हारे मुंह में, तुम्हारे हर अंग में…
ये जुनून है, ये पागलपन है, ये वो जन्नत है जो कभी खत्म नहीं होती, और अंजलि… वो इसकी देवी है, मेरी देवी, मेरी रंडी, मेरी भाभी, मेरी जन्नत… हमेशा के लिए, हर चुदाई में, हर झड़ने में, हर पल में जो हम एक-दूसरे के साथ बिताते हैं, नंगे, गंदे, पागल, और पूरी तरह से खुश… ये है असली जन्नत, और मैं इसका राजकुमार, नहीं, इसका गुलाम, इसका दास, जो अपनी देवी की चूत में रहना चाहता है, हमेशा, हर पल, हर सांस में…
अंजलि, मैं आ रहा हूं… अपनी चूत गीली रखना… मैं आ रहा हूं… जन्नत दिखाने के लिए… या जन्नत में रहने के लिए… या शायद, दोनों के लिए… क्योंकि तुम और मैं, हम जन्नत हैं, एक-दूसरे की जन्नत, एक ऐसी जन्नत जो कभी खत्म नहीं होती, बस चलती रहती है, चुदाई दर चुदाई, प्यार दर प्यार, पागलपन दर पागलपन… हमेशा के लिए, अंजलि और मैं, दो जिस्म, एक रूह, एक चूत, एक लंड, और एक अंतहीन कहानी जो कभी खत्म नहीं होगी, क्योंकि ये जन्नत है, और जन्नत कभी खत्म नहीं होती… never… never… never…