भाग 1: शुरुआत और अनजाने इशारे
मेरा नाम पंकज है में एक प्राइवेट जिम ट्रेनर हूं मैंने कभी नहीं सोचा था मेरी लाइफ में ऐसा कुछ भी होगा|. संगीता भाभी, उम्र 32 साल, एक ऐसी औरत जिसका फिगर 36-29-36 हर किसी को दीवाना बना दे। उनकी गोरी-गोरी त्वचा, लंबे काले बाल, और वो होंठ जो हमेशा लाल लिपस्टिक में तरोताजा दिखते थे। पति करन एक बिजनेसमैन थे जो अक्सर टूर पर रहते थे, और संगीता अपने शरीर को मेंटेन रखने के लिए पिछले एक साल से जिम जा रही थीं। जिम ट्रेनर जिसको बनाया मैंने अपनी चूत का दीवाना
लेकिन कोई रिजल्ट नहीं। वो परेशान थीं। उनका शरीर पहले से ही सेक्सी था, लेकिन वो और बेहतर दिखना चाहती थीं। एक दिन करन ने कहा, “जानू, मैं तुम्हारे लिए एक परसनल ट्रेनर हायर कर देता हूँ। वो घर पर ही तुम्हें ट्रेनिंग देगा।”
अगले ही दिन पंकज आया। उम्र 28 साल, हाइट 6 फीट, बॉडी बिल्डर जैसा बदन, टी-शर्ट में फूले हुए सीने और बाइसेप्स जो किसी भी औरत को पागल कर दें। उसका चेहरा इतना हैंडसम था कि संगीता ने जब पहली बार दरवाजा खोला तो उनके होश उड़ गए।
“हैलो मैम, मैं पंकज हूँ, आपका नया ट्रेनर,” उसने मुस्कुराते हुए कहा।
संगीता ने एक टाइट टी-शर्ट और लेगिंग पहनी हुई थी। उनके उभरे हुए बूब्स टी-शर्ट से बाहर आने को तरस रहे थे। पंकज की नजरें एक सेकंड के लिए उनके बूब्स पर टिकीं, फिर उसने नजरें झुका लीं।
पहले दिन से ही दोनों के बीच कुछ अलग सा था। जब पंकज उन्हें स्ट्रेचिंग करवाता, तो कभी-कभी उसका हाथ उनकी जांघों पर लग जाता। वो “एक्सीडेंटली” उनके कमर को पकड़कर उन्हें सीधा खड़ा करता, और उसका लंड कभी-कभी उनकी गांड से टच हो जाता।
संगीता भी अनजाने में ही सही, उसके सामने झुककर डंबल उठाती जिससे उसका क्लीवेज पूरी तरह दिखता। पंकज का लंड खड़ा हो जाता, लेकिन वो अपनी ट्रैक पैंट में उसे छुपाने की कोशिश करता।

ये सिलसिला चलता रहा। दोनों एक-दूसरे को देखकर तरसते, लेकिन कुछ कहते नहीं। संगीता को भी पता था कि पंकज उन्हें कैसे देखता है, और पंकज को भी पता था कि भाभी जानबूझकर उसे तड़पाती हैं।
भाग 2: वो शाम जब सब बदल गया
एक शाम का वाकया। आमतोर पर पंकज शाम 5 बजे आता था, लेकिन उस दिन वो 6:30 बजे पहुँचा। संगीता को लगा कि उनकी कामवाली बाई काम खत्म करके जा रही है, क्योंकि उसने दरवाजे पर आवाज़ सुनी थी।
उन्होंने अभी-अभी नहाया था। उन्होंने सोचा, बाई है, कोई बात नहीं। उन्होंने ब्लाउज का एक ही बटन लगाया था, और नीचे सिर्फ पेटीकोट पहना था। ब्रा नहीं पहनी थी, उनके गोल-गोल बूब्स आधे बाहर झाँक रहे थे। बाल गीले थे, पानी की बूंदें उनके गालों से होते हुए गर्दन पर जा रही थीं।
जैसे ही उन्होंने दरवाजा खोला…
पंकज खड़ा था। उसकी आँखें संगीता के शरीर पर टिक गईं। वो पहले उनके चेहरे पर गईं, फिर गीले बालों पर, फिर उस खुले ब्लाउज में जो उनके बूब्स को आधा ढक रहा था। उनके गोल मम्मे, गुलाबी निप्पल आधे दिख रहे थे। फिर उसकी नजर नीचे गई, पेटीकोट पर, जो उनकी नाभि से ऊपर था, गीली चूत का उभार साफ दिख रहा था। जिम ट्रेनर जिसको बनाया मैंने अपनी चूत का दीवाना
दोनों एक-दूसरे को देखते रहे। संगीता को समझने में एक सेकंड लगा, फिर उन्होंने शर्म से अपने हाथों से अपना ब्लाउज ढकने की कोशिश की।
“अरे… पंकज… तुम… मुझे लगा…” वो हकलाने लगीं।
पंकज ने कहा, “सॉरी मैम, मैं लेट हो गया। अगर आप चाहें तो मैं बाद में आ जाऊँगा…”
लेकिन वो हिला नहीं। उसकी आँखें उनके शरीर से हट नहीं रही थीं।
संगीता ने अपने अंदर एक अजीब सी गर्मी महसूस की। वो जानती थीं कि यह गलत है, लेकिन उनका शरीर कुछ और ही कह रहा था। उनकी चूत में एक झनझनाहट होने लगी, गीली होने लगी।
“नहीं… अंदर आ जाओ,” उन्होंने धीरे से कहा, और पीछे हटकर रास्ता दिया।
पंकज अंदर आया। उसका दिल धड़क रहा था, लंड पैंट में तनकर खड़ा हो गया था। संगीता ने देखा कि उसके ट्रैक पैंट में एक बड़ा उभार है, और उनके मुँह से बिना सोचे निकल पड़ा, “तुम्हारा तो… बहुत बड़ा है…”
पंकज शर्मा गया, “मैम… वो…”
संगीता ने कहा, “आज कोई मैम-सैम नहीं। मैं संगीता हूँ, और तुम… तुम मुझे अच्छे लगते हो पंकज…”
भाग 3: पहली बार – अनजानी चाहत
पंकज ने एक कदम आगे बढ़ाया। संगीता खड़ी थीं, साँसें तेज चल रही थीं, उनके बूब्स ऊपर-नीचे हो रहे थे। पंकज ने धीरे से अपना हाथ उठाया और उनके गीले बालों को कान के पीछे किया।
“आप… बहुत खूबसूरत हैं…” उसने फुसफुसाया।
संगीता ने अपने हाथ उसके सीने पर रखे, उसकी धड़कन महसूस की। “तुम्हारा दिल तेज धड़क रहा है…”
“आपके लिए…” पंकज ने कहा।
अचानक, पंकज ने उन्हें अपनी बाहों में भर लिया। उसका लंड उनके पेट से टच हो रहा था, कड़ा, गर्म, बड़ा। संगीता ने महसूस किया कि वो कितना बड़ा है, और उनकी चूत में पानी आने लगा।
“उह्ह्ह… पंकज…” संगीता ने आँखें बंद करते हुए कहा।
पंकज ने उनका चेहरा ऊपर उठाया, और उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। एक जोरदार, गर्म, गीला चुम्बन। संगीता ने भी प्रतिक्रिया दी, उनकी जीभ उसकी जीभ से मिली, दोनों एक-दूसरे को चूसने लगे। जिम ट्रेनर जिसको बनाया मैंने अपनी चूत का दीवाना
“म्म्म्म… उम्म्म… आह्ह्ह…” संगीता की आवाजें निकलने लगीं।
पंकज ने एक हाथ से उनका ब्लाउज खींचा, और वो खुल गया। उनके दोनों बूब्स आज़ाद हो गए, गोल, गुलाबी निप्पल खड़े हो गए थे। पंकज ने एक बूब्स पकड़ा और दूसरे को मुँह में लेकर चूसने लगा।
“ओह्ह्ह… हाँ… और जोर से… उम्म्म…” संगीता सिसकने लगीं।
वो उसके सिर को अपने बूब्स पर दबा रही थीं। पंकज एक-एक करके दोनों बूब्स चूस रहा था, काट रहा था, निप्पलों को अपने दाँतों से कस रहा था।
“आह्ह्ह… पंकज… बहुत मज़ा आ रहा है… ऊईईई… माँ…”
पंकज का हाथ नीचे गया, उसने उनका पेटीकोट ऊपर उठाया। संगीता ने कुछ नहीं पहना था नीचे, उनकी चूटड़ें और चूत साफ दिख रही थी। चूत पर हल्के-हल्के बाल थे, गीली, चमकदार।
“वाह… क्या चूत है आपकी…” पंकज ने कहा।
उसने एक उँगली उनकी चूत में डाली। गीली, गर्म, टाइट चूत थी। संगीता चीख उठीं, “उईईई… धीरे…”
“क्या हुआ मैम… मज़ा नहीं आ रहा?” पंकज ने शरारत से पूछा।
“आ रहा है… बहुत आ रहा है… और डालो…” संगीता ने कहा।
पंकज ने दो उँगलियाँ अंदर डाल दीं, और अंदर-बाहर करने लगा। संगीता की चूत पच-पच की आवाजें कर रही थी, इतनी गीली थी।
“आह्ह्ह… हाँ… और तेज़… फक मी… उईईई… ओह्ह्ह माय गॉड…” संगीता चिल्लाने लगीं।
पंकज ने उन्हें सोफे पर लिटा दिया, उनके पैर फैलाए, और उनकी चूत पर अपना मुँह लगा दिया। उसने जीभ से चूत को चाटना शुरू किया, क्लिटोरिस को चूसा, उँगली अंदर बाहर करता रहा।
“उह्ह्ह… हाँ… वहीं… वहीं चाटो… ओह्ह्ह… मैं पागल हो जाऊँगी…” संगीता अपनी कमर हिला रही थीं।
पंकज ने उनकी टांगें अपने कंधों पर रखीं और जोर-जोर से चूत चाटने लगा। संगीता की आवाजें पूरे घर में गूँज रही थीं, “आह्ह्ह… हाँ… और… ओह्ह्ह… मैं झड़ने वाली हूँ… उईईई…”
और फिर वो झड़ गईं, पंकज के मुँह में अपना पानी छोड़ दिया, काँपती हुई, सिसकती हुई।
भाग 4: लंड का आगमन
संगीता अभी काँप ही रही थीं कि पंकज ने अपनी टी-शर्ट और ट्रैक पैंट उतार दी। उसका लंड बाहर आया, 9 इंच लंबा, मोटा, काला, नसों से भरा हुआ, टोपी लाल। संगीता की आँखें खुली रह गईं। जिम ट्रेनर जिसको बनाया मैंने अपनी चूत का दीवाना
“इतना बड़ा…” उन्होंने डरते हुए कहा।
“डरो मत मैम… आपकी चूत इसे पचा लेगी…” पंकज ने कहा।
उसने संगीता के पैर खोले, अपने लंड को उनकी चूत के मुँह पर रगड़ा। गीली चूत में लंड आसानी से अंदर जाने को तैयार थी।
“धीरे से डालना… पहली बार इतना बड़ा लूँगी…” संगीता ने कहा।
पंकज ने धीरे से लंड का सिरा अंदर डाला। संगीता की साँसें रुक गईं, “उईईई… बहुत मोटा है…”
“सहन करो मैम… अभी मज़ा आएगा…” पंकज ने कहा।
उसने एक जोरदार धक्का मारा, आधा लंड अंदर चला गया। संगीता चीख पड़ीं, “आह्ह्ह… माँ… बहुत दर्द हो रहा है…”
“थोड़ी देर में ठीक हो जाएगा…” पंकज ने कहा और उनके होंठ चूमने लगा।
थोड़ी देर बाद जब संगीता ढीली हुईं, पंकज ने दूसरा धक्का मारा, पूरा लंड अंदर समा गया। संगीता की आँखों से आँसू निकले, लेकिन दर्द के साथ मज़ा भी आ रहा था।
“अब… चोदो मुझे… तेज़…” संगीता ने कहा।
पंकज ने धक्के मारने शुरू किए। धक-धक-धक… आवाज़ें गूँज रही थीं। संगीता की चूत से पच-पच की आवाजें आ रही थीं, इतनी गीली थी।
“आह्ह्ह… हाँ… और तेज़… फक मी हार्ड… उईईई… ओह्ह्ह…” संगीता चिल्ला रही थीं।
पंकज ने उनकी टांगें अपने कंधों पर रखीं और जोर-जोर से चोदने लगा। उसका लंड पूरी तरह अंदर-बाहर हो रहा था, संगीता की चूत फैल रही थी।
“कैसा लग रहा है मैम… मेरा लंड…” पंकज ने पूछा।
“बहुत अच्छा… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… आह्ह्ह…” संगीता ने कहा।
पंकज ने उन्हें घोड़ी बनाया, पीछे से उनकी चूत में लंड डाला। अब और भी गहरा जा रहा था, संगीता की गांड उठी हुई थी, वो अपनी कमर पीछे धकेल रही थीं।
“आह्ह्ह… पंकज… मेरी जान… और तेज़… उईईई… ओह्ह्ह माय गॉड…” संगीता चीख रही थीं।
पंकज ने उनके बाल पकड़े, पीछे खींचा, और जोर-जोर से चोदने लगा। उसके थूथनों से आवाज़ें निकल रही थीं, “धक-धक-धक…”
“मैं झड़ने वाला हूँ…” पंकज ने कहा।
“अंदर ही डाल दो… मुझे गरम पानी चाहिए… आह्ह्ह…” संगीता ने कहा।
पंकज ने कुछ और जोरदार धक्के मारे, और फिर अपना गरम वीर्य संगीता की चूत में छोड़ दिया। दोनों एक साथ झड़े, काँपते हुए, एक-दूसरे से लिपटे हुए।
भाग 5: नए प्रयोग और गांड की चुदाई
अगले कुछ दिनों में दोनों ने खूब चुदाई की। हर पोजीशन में, हर जगह। किचन में, बाथरूम में, बेडरूम में, ड्राइंग रूम में। संगीता की चूत अब पंकज के लंड के लिए आदी हो गई थी। जिम ट्रेनर जिसको बनाया मैंने अपनी चूत का दीवाना
एक दिन पंकज ने कहा, “मैम, आज कुछ अलग करें?”
“क्या?” संगीता ने पूछा।
“आपकी गांड… मुझे वो मारनी है…” पंकज ने कहा।
संगीता शर्मा गईं, “वहाँ… वो तो बहुत दर्द करेगा…”
“पहले दर्द होगा, फिर मज़ा आएगा… ट्रस्ट मी…” पंकज ने कहा।
संगीता ने हामी भर दी। पंकज ने उन्हें बेड पर घोड़ी बनाया, उनकी गांड पर तेल लगाया, और अपने उँगली से उनकी गांड को तैयार किया। एक उँगली अंदर गई, संगीता सिसकी, “उईईई…”
“सहन करो मैम… अभी और जाएगा…” पंकज ने कहा।
दो उँगलियाँ, फिर तीन। संगीता की गांड ढीली हो गई। पंकज ने अपने लंड पर तेल लगाया, और उनकी गांड के मुँह पर रखा।
“ध्यान से…” संगीता ने कहा।
पंकज ने धीरे से दबाया, लंड का सिरा अंदर गया। संगीता चीख उठीं, “आह्ह्ह… बहुत दर्द है…”
पंकज ने रुककर उनकी चूत सहलाई, “शांत हो जाओ… थोड़ा सहन करो…”
फिर उसने एक जोरदार धक्का मारा, आधा लंड अंदर चला गया। संगीता की आँखों से आँसू निकले, लेकिन वो कह रही थीं, “चोदो… मेरी गांड चोदो…”
पंकज ने धक्के मारने शुरू किए। धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर चला गया। संगीता को अब मज़ा आने लगा, एक अलग ही संवेदना थी।
“आह्ह्ह… हाँ… और तेज़… मेरी गांड फाड़ दो… उईईई…” संगीता चिल्ला रही थीं।
पंकज ने जोर-जोर से उनकी गांड मारी, उनके बाल पकड़े, पीठ पर थप्पड़ मारे। संगीता की गांड लाल हो गई, लेकिन वो और चाहती थीं।
“मैं झड़ने वाला हूँ…” पंकज ने कहा।
“अंदर डाल दो… मेरी गांड में ही झड़ जाओ…” संगीता ने कहा।
पंकज ने अपना पूरा वीर्य उनकी गांड में छोड़ दिया, और दोनों बेड पर गिर पड़े।
भाग 6: त्रिगुट और नई कहानियाँ
अब तक संगीता पूरी तरह पंकज की हो चुकी थीं। वो हर दिन उससे चुदवातीं, कभी चूत, कभी गांड, कभी मुँह। पंकज ने उन्हें डीप थ्रोट भी सिखाया, पूरा लंड मुँह में लेना।
एक दिन पंकज ने कहा, “मैम, आज मैं एक दोस्त को लाया हूँ… वो भी आपको चोदना चाहता है…”
संगीता ने पहले तो मना किया, लेकिन फिर मान गईं। उस दिन दो लंडों का मज़ा लिया, एक चूत में, एक गांड में, एक मुँह में। त्रिगुट का मज़ा ही कुछ और था। जिम ट्रेनर जिसको बनाया मैंने अपनी चूत का दीवाना
“उईईई… दोनों मुझे चोदो… आह्ह्ह… मैं पागल हो जाऊँगी…” संगीता चिल्ला रही थीं।
दोनों लड़कों ने उन्हें बारी-बारी से चोदा, उनकी चूत और गांड दोनों भर दी वीर्य से।
भाग 7: पति के सामने चुदाई
एक दिन करन अचानक घर आ गए। उन्होंने देखा कि संगीता और पंकज बेड पर नंगे लेटे हैं, पंकज का लंड अभी भी संगीता की चूत में है।
करन हैरान थे, लेकिन फिर उन्होंने देखा कि संगीता कितनी खुश दिख रही थीं। उन्होंने फैसला किया कि वो भी शामिल होंगे।
उस रात करन ने पहली बार अपनी पत्नी को किसी और से चुदवाते देखा। पंकज संगीता को चोद रहा था, और करन उनके बूब्स चूस रहे थे। जिम ट्रेनर जिसको बनाया मैंने अपनी चूत का दीवाना
“आह्ह्ह… दोनों मुझे चोदो… मैं झड़ रही हूँ… उईईई…” संगीता चिल्ला रही थीं।
ये एक नई शुरुआत थी, जहाँ तीनों मिलकर सेक्स का आनंद लेते थे।
भाग 8: अंतिम दिन और नया सफर
अब संगीता की बॉडी पूरी तरह बदल गई थी। उनके बूब्स और भी टाइट हो गए थे, गांड और भी उभरी हुई, चूत और भी गीली। वो जिम जाती थीं, लेकिन अब एक्सरसाइज का मतलब सिर्फ पंकज से चुदवाना था।
एक दिन पंकज ने कहा, “मैम, मुझे दूसरे शहर जाना है…”
संगीता रोने लगीं, लेकिन उन्होंने पंकज को विदा किया, और एक आखिरी बार खूब चुदवाया।
“आह्ह्ह… पंकज… तुम्हें याद करूँगी… उईईई… और जोर से… मेरी चूत में अपना निशान छोड़ जाओ…”
पंकज ने उनकी चूत में तीन बार वीर्य छोड़ा, गांड में दो बार, और मुँह में एक बार।
अलविदा कहते हुए दोनों ने एक-दूसरे को कसकर गले लगाया।
लेकिन यह अंत नहीं था। कुछ महीनों बाद पंकज वापस आया, और इस बार संगीता ने उसे अपने घर में ही रख लिया, एक नए रिश्ते के साथ – एक प्रेमी के रूप में, जो कभी-कभी उनके पति के साथ मिलकर उन्हें चोदता था।
और यूँ संगीता भाभी की ज़िंदगी एक नई, गर्म, सेक्सी कहानी बन गई, जहाँ हर दिन नए प्रयोग, नई चुदाई, और नई उईईई-आह्ह्ह-ओह्ह्ह की आवाजें गूँजती रहती थीं।
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